संसद के शीतकालीन सत्र में विधायी कामकाज की रफ्तार तेज

नई दिल्ली :- संसद का शीतकालीन सत्र आज पांचवें दिन में पहुंच गया है और सत्र के शुरुआती दिनों से ही दोनों सदनों में चर्चाओं का माहौल काफी सक्रिय दिखाई दे रहा है। यह सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा और सरकार ने इस अवधि में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने की योजना बनाई है। इनमें सबसे चर्चित एटॉमिक एनर्जी बिल है जिसे देश की परमाणु ऊर्जा व्यवस्था को और आधुनिक और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। इस बिल पर विपक्ष और विशेषज्ञों की निगाहें टिकी हुई हैं क्योंकि इससे परमाणु क्षेत्र में नीतिगत बदलावों की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

 

इसके अलावा सरकार कुल दस प्रमुख विधेयक सत्र में पेश करने की तैयारी में है। इन विधेयकों में तकनीकी क्षेत्र से जुड़े सुधार सामाजिक सुरक्षा को मजबूत बनाने वाले प्रावधान कृषि से संबंधित प्रस्ताव और प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता बढ़ाने वाले बदलाव शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन विधेयकों से देश की विकास गति और मजबूत होगी और विभिन्न क्षेत्रों में आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

 

सत्र के दौरान विपक्ष ने भी कई मुद्दों पर चर्चा की मांग की है। महंगाई बेरोजगारी सीमा सुरक्षा और किसानों से जुड़े विषयों पर बहस की अपेक्षा की जा रही है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को केवल विधेयक पारित करने पर ही नहीं बल्कि उन समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए जो सीधे जनता से जुड़ी हैं। उधर सरकार का दावा है कि वह हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है बशर्ते सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रहे।

सदनों में होने वाली बहसें आने वाले दिनों में और तीव्र हो सकती हैं क्योंकि कई विधेयक व्यापक प्रभाव डालने वाले हैं। जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सत्र में कितने विधेयक पारित होते हैं और किस प्रकार की चर्चाएं देश के भविष्य को दिशा देंगी। शीतकालीन सत्र का यह दौर विधायी दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इससे संसद की कार्यक्षमता का आकलन भी होगा।

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