लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवालों के बीच बढ़ी राजनीतिक तकरार

नई दिल्ली:- शिवसेना यूबीटी की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान का समर्थन किया जिसमें दावा किया गया था कि विपक्ष के प्रमुख नेताओं को सुरक्षा कारणों का हवाला देकर विदेशी राष्ट्राध्यक्षों से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इस मुद्दे ने राष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है जहां विपक्ष लगातार सरकार पर संस्थागत दबाव और राजनीतिक दखल की बात उठा रहा है।

 

प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती का आधार केवल सत्ता पक्ष नहीं होता बल्कि विपक्ष की स्वतंत्र भूमिका और संवाद का अधिकार भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्षी नेताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बात रखने या कूटनीतिक मुलाकातों में हिस्सा लेने से रोक दिया जाता है तो यह लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा प्रहार माना जाएगा। उनके अनुसार ऐसे कदम न केवल राजनीतिक संतुलन को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने भी देश की लोकतांत्रिक छवि को धूमिल करते हैं।

 

राहुल गांधी ने हाल ही में दावा किया था कि सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन द्वारा ऐसे निर्देश दिए जा रहे हैं जिनके तहत उन्हें विदेशी मेहमानों से मिलने की अनुमति नहीं मिल रही है। इस बयान पर सत्तापक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सभी नेताओं पर समान नियम लागू होते हैं और इसे राजनीतिक रंग देना गलत है। हालांकि विपक्ष इसे सत्ता के केंद्रीकरण और असहमति को सीमित करने का प्रयास बता रहा है।

यह विवाद एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि भारत की राजनीति में संवाद की कमी और अविश्वास का दायरा लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतंत्र की स्वस्थ दिशा के लिए सत्ता और विपक्ष के बीच समान अवसर पारदर्शिता और सहयोग आवश्यक है। इस मुद्दे पर स्पष्टता और संतुलित नीति ही भविष्य की राजनीति को बेहतर दिशा दे सकती है।

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