भारत में ब्लैडर कैंसर की बढ़ती चुनौती

नई दिल्ली :- ब्लैडर कैंसर जिसे मूत्राशय का कैंसर कहा जाता है आज भारत में तेजी से फैल रही गंभीर बीमारियों में शामिल हो गया है। यह बीमारी न केवल मरीजों के जीवन के लिए खतरा बन रही है बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने भी बड़ी चुनौती पेश कर रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 में भारत में ब्लैडर कैंसर के तेईस हजार के करीब मामले दर्ज किए गए थे और इनमें से बारह हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि बीमारी कितनी तेजी से बढ़ रही है और इसका समय पर निदान कितना आवश्यक है।

 

ब्लैडर कैंसर का मुख्य कारण अक्सर तंबाकू का सेवन माना जाता है। सिगरेट बीड़ी और तंबाकू के अन्य रूपों का लंबे समय तक उपयोग मूत्राशय में कैंसर कोशिकाओं के विकास की संभावना को काफी बढ़ा देता है। इसके अलावा दूषित पानी औद्योगिक रसायनों के संपर्क में आना और बार बार होने वाले मूत्र संक्रमण भी इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा देते हैं। कई बार शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य दिखते हैं जैसे मूत्र में खून आना बार बार पेशाब लगना या पेशाब करते समय दर्द होना जिससे मरीज समय पर डॉक्टर के पास नहीं पहुंच पाता।

 

यदि बीमारी का जल्दी पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है। आधुनिक चिकित्सा में सर्जरी कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसे उपचार उपलब्ध हैं। लेकिन समस्या यह है कि बड़ी संख्या में मरीज देर से अस्पताल पहुंचते हैं जिससे इलाज जटिल और महंगा हो जाता है। जागरूकता की कमी भी इस बीमारी को और गंभीर बना रही है।

भारत में ब्लैडर कैंसर की रोकथाम के लिए आवश्यक है कि लोग तंबाकू से दूरी बनाएं साफ पानी का उपयोग करें और किसी भी असामान्य मूत्र लक्षण की उपेक्षा न करें। सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों को भी जागरूकता अभियान को और मजबूत करना होगा ताकि लोग समय पर जांच करा सकें और बीमारी से बच सकें।यह बीमारी गंभीर है लेकिन जागरूकता और समय पर उपचार से इससे लड़ना पूरी तरह संभव है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *