मुंबई (महाराष्ट्र):- आरबीआई द्वारा रेपो रेट में कटौती बैंकों को लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपए की लिक्विडिटी सपोर्ट और मौद्रिक नीति में न्यूट्रल स्टांस जैसे सकारात्मक संकेतों ने इस उम्मीद को मजबूत किया था कि सोमवार को शेयर बाजार मजबूत शुरुआत करेगा। विशेषज्ञों का अनुमान था कि अतिरिक्त लिक्विडिटी और सस्ते कर्ज की उम्मीद निवेशकों की धारणा को मजबूत करेगी और बाजार में तेज उछाल देखने को मिलेगा।लेकिन वास्तविकता उम्मीदों के विपरीत रही। बाजार ने न केवल तेज़ी नहीं दिखाई बल्कि निवेशक सतर्क रुख अपनाते हुए सीमित दायरे में ट्रेडिंग करते दिखे।
दरअसल वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव और घरेलू अर्थव्यवस्था के कुछ संकेतकों को लेकर बनी आशंकाओं ने सकारात्मक कारकों का असर कम कर दिया। निवेशक यह भी देखना चाहते हैं कि रेपो रेट कट का वास्तविक असर बैंकिंग सेक्टर और क्रेडिट ग्रोथ पर कितनी जल्दी दिखाई देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नीति संबंधी सकारात्मक घोषणाओं का असर धीरे धीरे बाजार में झलकेगा लेकिन अल्पकाल में विदेशी संकेत और वैश्विक आर्थिक चिंताएं बाजार की चाल तय करेंगी।
सोमवार का सुस्त प्रदर्शन यह दिखाता है कि सिर्फ नीतिगत प्रोत्साहन पर्याप्त नहीं है बाजार भरोसा तभी दिखाता है जब वैश्विक और घरेलू दोनों ही मोर्चों पर स्थिरता और स्पष्टता हो।