नई दिल्ली:- शेयर बाजार में नियमों और प्रक्रियाओं में समय समय पर बदलाव होते रहते हैं जिनका उद्देश्य निवेशकों और ट्रेडर्स को अधिक सुविधा और पारदर्शिता देना होता है। इसी क्रम में एक्सचेंज ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है जो डिरेवेटिव कारोबार करने वालों के लिए बड़े बदलाव जैसा है। अब डिरेवेटिव ट्रेडिंग में प्री ओपन सेशन की अनुमति दे दी गई है और यह सुविधा आठ दिसंबर से लागू हो चुकी है।
डिरेवेटिव मार्केट में प्री ओपन सेशन की शुरुआत का सीधा लाभ उन लाखों निवेशकों को मिलेगा जो बाजार खुलने से पहले की स्थिति को समझकर अपने ऑर्डर प्लान करना चाहते हैं। अब उन्हें इक्विटी मार्केट की तरह प्री ओपन में ऑर्डर लगाने का मौका मिलेगा जिससे शुरुआती उतार चढ़ाव को अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा। इस नए नियम से बाजार में पारदर्शिता और स्थिरता दोनों बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि अचानक होने वाली तीव्र हलचल को संतुलित किया जा सकेगा।
प्री ओपन सेशन में निवेशक अपने बाय और सेल ऑर्डर पहले से दर्ज कर सकते हैं जिससे बाजार खुलने पर उचित प्राइस डिस्कवरी संभव होती है। इससे शुरुआती मिनटों में वोलैटिलिटी कम होने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसले डिरेवेटिव मार्केट को और अधिक उन्नत और व्यवस्थित बनाएंगे।
नए नियम के लागू होने से ट्रेडर्स को अपनी रणनीतियों को और बेहतर तरीके से सेट करने का अवसर मिलेगा। बाजार खुलने के पहले पांच से दस मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इन्हीं क्षणों में निवेशकों की भावना का अंदाजा लगाया जाता है। प्री ओपन सेशन के बाद शुरुआती कैंडल अधिक सटीक बनने की संभावना रहती है जिससे डे ट्रेडर्स और ऑप्शन ट्रेडर्स को अतिरिक्त लाभ मिल सकता है।
सेबी और एक्सचेंज का यह कदम भारतीय बाजार को अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों के और करीब ले जाता है। यह सुविधा तकनीकी विश्लेषण और तेज गति वाले ट्रेडिंग मॉडल अपनाने वाले निवेशकों के लिए बेहद कारगर साबित हो सकती है। कुल मिलाकर डिरेवेटिव मार्केट में प्री ओपन सेशन की यह शुरुआत बाजार संरचना को मजबूत करने वाली ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है।