नई दिल्ली :- शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक का उपयोग अब किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रहा बल्कि विद्यालयों के स्तर पर भी इसका प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। इसी दिशा में प्रदेश की सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए यह लक्ष्य निर्धारित किया है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष के अंत तक यानी मार्च महीने तक प्रदेश की चौहत्तर फीसदी परिषदीय स्कूलों में स्मार्ट क्लास की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। यह पहल बच्चों को आधुनिक तरीके से शिक्षा प्रदान करने और उन्हें तकनीकी दुनिया से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन साबित होगी।
इस समय प्रदेश में लगभग छहचालीस दशमलव उन्नहत्तर प्रतिशत परिषदीय स्कूलों में ही स्मार्ट क्लास उपलब्ध है। यह आंकड़ा बताता है कि अभी भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी आधुनिक सुविधाओं से वंचित हैं। लेकिन सरकार द्वारा शुरू की गई इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ महीनों में यह अंतर तेजी से कम होगा। स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को विषयों की गहराई समझने में आसानी होगी क्योंकि दृश्य और श्रव्य माध्यमों के उपयोग से शिक्षा अधिक रोचक और प्रभावी बन जाती है।
स्मार्ट क्लास में डिजिटल कंटेंट इंटरएक्टिव स्क्रीन और ऑडियो वीडियो सामग्री का उपयोग किया जाता है जिससे विद्यार्थी केवल पढ़ाई को समझ ही नहीं पाते बल्कि उसे याद भी लंबे समय तक रख पाते हैं। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में जहां पारंपरिक शिक्षा सीमित साधन पर आधारित होती है वहां यह तकनीक शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने वाली है।
इस प्रयास से शिक्षकों को भी नई तकनीक सीखने और आधुनिक शिक्षण पद्धति अपनाने का अवसर मिलेगा। इससे कक्षा का माहौल अधिक सक्रिय और प्रभावी बनेगा और बच्चे आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई में भाग लेंगे।
कुल मिलाकर यह योजना प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में एक सकारात्मक बदलाव ला रही है और आगामी समय में परिषदीय स्कूलों का स्वरूप और भी आधुनिक और सक्षम बनने की उम्मीद है।