छत्तीसगढ़ :- बिलासपुर में हुए लालखदान रेल हादसे को लेकर कमीशन ऑफ रेलवे सेफ्टी यानी सीआरएस ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी कर दी है। इस रिपोर्ट ने रेलवे प्रशासन की बड़ी लापरवाही को उजागर करते हुए स्पष्ट कहा है कि दुर्घटना की सबसे बड़ी वजह मेमू ट्रेन को एक अप्रशिक्षित चालक के हवाले करना था। इस गंभीर चूक के कारण ही यह भयावह हादसा हुआ, जिसमें 12 यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई और कई यात्री गंभीर रूप से घायल हुए।
रिपोर्ट के अनुसार घटना वाले दिन मेमू ट्रेन को जिस चालक के हवाले किया गया, उसके पास न तो आवश्यक प्रशिक्षण था और न ही मेमू जैसी इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट ट्रेन को चलाने का पर्याप्त अनुभव। ट्रेन के तकनीकी संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं की जानकारी न होने के कारण चालक ट्रेन की गति और सिग्नलिंग सिस्टम को नियंत्रित नहीं कर सका। परिणामस्वरूप, ट्रेन निर्धारित प्वाइंट से आगे बढ़ गई और तेज रफ्तार के चलते पटरी से उतर गई, जिससे कोच बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।
सीआरएस ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया है कि रेलवे प्रशासन ने चालक की पात्रता सत्यापित किए बिना उसे ड्यूटी पर भेजने का निर्णय लिया, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है। प्रशिक्षण और दक्षता प्रमाणपत्र की अनदेखी न केवल यात्री सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है बल्कि रेलवे के मूल सुरक्षा प्रोटोकॉल की भी गंभीर अवमानना है।
जानकारी के मुताबिक, हादसे के बाद रेलवे के विभिन्न विभागों में जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ गया है। जांच टीम ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है और संकेत दिए हैं कि जिन अधिकारियों की लापरवाही स्थापित होगी, उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है।
स्थानीय यात्रियों और परिजनों ने भी रिपोर्ट जारी होने के बाद रेलवे प्रशासन से न्याय की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो इसके लिए उच्च स्तर पर कठोर सुधार और सख्त नियम लागू किए जाएं।
यह हादसा एक बार फिर इस बात पर जोर देता है कि प्रशिक्षित और जिम्मेदार कार्मिक ही यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।