TB Drugs : टीबी के जीवाणुओं की फैटी परत को निशाना बनाकर मौजूदा दवाओं को बनाया जा सकता है अधिक प्रभावी

TB Drugs नई दिल्ली:- टीबी के जीवाणुओं की फैटी परत को निशाना बनाकर मौजूदा दवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है यह दावा किया है भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे और मोनाश विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने।

टीबी जिसे माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु द्वारा फैलाया जाता  एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है। 2023 में, लगभग 10.8 मिलियन लोग टीबी से पीड़ित हुए और 1.25 मिलियन लोगों की मृत्यु हो गई। भारत में टीबी के सबसे अधिक मामले हैं जहां 2024 में 2.6 मिलियन से अधिक मामले दर्ज किए गए। शोधकर्ताओं ने पाया कि टीबी के जीवाणुओं की फैटी परत उन्हें एंटीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी बनाती है। इस परत को निशाना बनाकर मौजूदा दवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

फैटी परत की भूमिका

टीबी के जीवाणुओं की फैटी परत उनकी कोशिका दीवार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह परत उन्हें एंटीबायोटिक्स और अन्य दवाओं से बचाती है जिससे उन्हें मारना मुश्किल हो जाता है।

नई रणनीति

शोधकर्ताओं ने पाया कि फैटी परत को निशाना बनाकर मौजूदा दवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने पाया कि फैटी परत को कमजोर करने से एंटीबायोटिक्स जीवाणुओं के अंदर पहुंच सकते हैं और उन्हें मार सकते हैं।

भविष्य की संभावनाएं

यह शोध टीबी के उपचार में एक नए युग की शुरुआत कर सकता है। मौजूदा दवाओं को अधिक प्रभावी बनाकर, टीबी के इलाज को और अधिक सफल बनाया जा सकता है।

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