मुंबई (महाराष्ट्र):- भारतीय शेयर बाजार सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन फिर कमजोर शुरुआत और कमजोर समाप्ति के साथ नजर आया। लगातार तीन सत्रों से लाल निशान में बंद हो रहे घरेलू बाजार ने निवेशकों की भावनाओं को प्रभावित किया है। बुधवार के कारोबार में सेंसेक्स एक बार फिर दबाव में दिखाई दिया और दिनभर की उतार चढ़ाव भरी गतिविधियों के बाद तीन सौ अंकों से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुआ। यह गिरावट केवल आंकड़ों का उतार नहीं बल्कि बाजार की बदलती मानसिकता का संकेत भी है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकेतों में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली घरेलू सूचकांकों पर भार डाल रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती और प्रमुख देशों की नीतिगत अनिश्चितता की वजह से भारतीय निवेशक सावधानी की मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव और रुपये की कमजोरी ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है।
निवेशकों ने आईटी बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में अधिक गिरावट का सामना किया जबकि कुछ चुनिंदा ऊर्जा और सार्वजनिक क्षेत्र के शेयरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली। हालांकि यह सीमित खरीद बाजार की समग्र कमजोरी को रोक नहीं सकी और सूचकांक अंततः लाल निशान में ही बंद हुए। लगातार हो रही गिरावट ने खुदरा निवेशकों को दूर से बाजार को परखने पर मजबूर कर दिया है और अधिकांश निवेशक नए फैसले लेने से पहले स्थिरता का इंतजार कर रहे हैं।
बाजार के जानकारों का कहना है कि यह गिरावट अस्थायी है और लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कई अच्छे अवसर पैदा कर सकती है। फिलहाल आवश्यक है कि निवेशक भावनाओं के बजाय ठोस रणनीति पर भरोसा करें और जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम न उठाएं। भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत आधारों पर टिकी है और आने वाले दिनों में बाजार में सुधार की संभावनाएं मौजूद हैं।