नई दिल्ली :- भारतीय उड्डयन क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला है क्योंकि सरकार ने इंडिगो एयरलाइंस पर कड़ा कदम उठाते हुए उसके दैनिक फ्लाइट शेड्यूल में दस प्रतिशत की कटौती का आदेश दिया है। इस फैसले के साथ ही अब इंडिगो की दो सौ से अधिक उड़ानें अन्य एयरलाइंस को री असाइन की जा सकती हैं। सरकार के इस निर्णय ने ना केवल यात्रियों का ध्यान खींचा है बल्कि पूरे एविएशन उद्योग में नई चर्चा भी शुरू कर दी है।
हाल के दिनों में इंडिगो पर कई तरह के संचालन संबंधी सवाल उठे थे। बढ़ती शिकायतें समय पर उड़ान संचालन में आई कमी और सेवाओं में लगातार गिरावट जैसे मुद्दों को गंभीरता से देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया है ताकि उड़ान संचालन में संतुलन बना रहे और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचा जा सके।
इंडिगो के लिए यह निर्देश एक बड़ा झटका है क्योंकि एयरलाइंस भारतीय घरेलू बाजार में सबसे अधिक हिस्सेदारी रखती है। अब उसे अपने शेड्यूल की दोबारा समीक्षा करनी होगी और परिचालन को नए तरीके से व्यवस्थित करना होगा। दूसरी ओर दूसरी कंपनियों को इन उड़ानों का लाभ मिलने की संभावना है जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।
सरकार का यह रुख साफ दिखाता है कि वह उड्डयन क्षेत्र में अनुशासन पारदर्शिता और गुणवत्ता पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। यह कदम इंडस्ट्री के लिए चेतावनी भी है कि सेवा में गिरावट या संचालन में लापरवाही को किसी भी परिस्थिति में सहन नहीं किया जाएगा।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इंडिगो इस चुनौती से कैसे निपटती है और क्या यह कदम भारत के हवाई सफर को और अधिक सुरक्षित व्यवस्थित और विश्वसनीय बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।