No Deaths नई दिल्ली:- भारत सरकार ने राज्यसभा में बताया है कि वायु प्रदूषण से सीधे तौर पर होने वाली मौतों के बारे में कोई ठोस आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि वायु प्रदूषण कई कारकों में से एक है जो श्वसन संबंधी बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ावा देता है।
जाधव ने कहा कि वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करते हैं जिनमें आहार, व्यावसायिक आदतें, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, चिकित्सा इतिहास, प्रतिरक्षा और आनुवंशिकता शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने वायु प्रदूषण के मुद्दे को संबोधित करने के लिए कई कदम उठाए हैं जिनमें राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम और जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम शामिल हैं।हालांकि एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण भारत में हर साल लगभग 1.72 मिलियन मौतें होती हैं जो 2010 के बाद से 38% की वृद्धि है। यह रिपोर्ट लैंसेट काउंटडाउन ऑन हेल्थ एंड क्लाइमेट चेंज द्वारा प्रकाशित की गई है।
वायु प्रदूषण के प्रभाव
वायु प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों के अलावा, यह कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को भी बढ़ावा देता है जिनमें श्वसन संबंधी बीमारियां, हृदय रोग, फेफड़े का कैंसर और अन्य शामिल हैं। वायु प्रदूषण के प्रभाव विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ते हैं।
सरकार के कदम
भारत सरकार ने वायु प्रदूषण के मुद्दे को संबोधित करने के लिए कई कदम उठाए हैं जिनमें शामिल हैं:
– राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम: यह कार्यक्रम वायु प्रदूषण को कम करने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की रणनीति है।
– जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम: यह कार्यक्रम जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य प्रभावों को संबोधित करने के लिए है।
– वायु गुणवत्ता निगरानी: सरकार ने वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली स्थापित की है ताकि वायु प्रदूषण के स्तर को ट्रैक किया जा सके।
– स्वास्थ्य सलाह: सरकार ने वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य सलाह जारी की है।
इन कदमों के बावजूद वायु प्रदूषण भारत में एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है और सरकार को इस मुद्दे को संबोधित करने के लिए और अधिक कदम उठाने की आवश्यकता है।