बीसीसीआई सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की नई व्यवस्था और खिलाड़ियों की जिम्मेदारी

नई दिल्ली :- भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड हर वर्ष अपने शीर्ष पुरुष और महिला खिलाड़ियों के लिए एक विशेष सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट प्रणाली जारी करता है। यह व्यवस्था खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम से औपचारिक रूप से जोड़ने के साथ ही उन्हें एक निश्चित आर्थिक सुरक्षा और पेशेवर मान्यता प्रदान करती है। बीसीसीआई सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट चार अलग अलग श्रेणियों में जारी किए जाते हैं जिनमें खिलाड़ियों के प्रदर्शन अनुभव और टीम में योगदान को आधार माना जाता है। यह कॉन्ट्रैक्ट न केवल खिलाड़ियों की वित्तीय मजबूती को दर्शाते हैं बल्कि उनके बीच अनुशासन समर्पण और निरंतरता को भी प्रोत्साहित करते हैं।

 

ग्रेड ए प्लस श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए होती है जो लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उच्च स्तर का प्रदर्शन कर रहे हैं और राष्ट्रीय टीम की रीढ़ माने जाते हैं। इसके बाद ग्रेड ए और ग्रेड बी श्रेणियां हैं जिनमें वे खिलाड़ी शामिल होते हैं जो श्रृंखलाओं में नियमित रूप से भाग लेते हैं और जिनसे टीम को भविष्य में बड़ी उम्मीदें रहती हैं। ग्रेड सी श्रेणी उभरते खिलाड़ियों को अवसर देने के लिए होती है ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित कर सकें और वरिष्ठ स्तर तक का सफर तय कर सकें।

 

यह पूरी प्रणाली टीम इंडिया के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करती है जिससे चयन प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है और खिलाड़ियों को यह समझ में आता है कि उन्हें किस स्तर पर पहुँचने के लिए कितना मेहनत करनी है। इसके तहत खिलाड़ियों को साल भर की विभिन्न श्रृंखलाओं और टूर्नामेंटों के हिसाब से रिटेनर फीस तय होती है साथ ही मैच फीस और बोनस भी जोड़े जाते हैं। बीसीसीआई की यह पहल खिलाड़ियों को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति अधिक जागरूक बनाती है क्योंकि सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ आर्थिक सुविधा नहीं बल्कि एक सम्मान भी है।

राष्ट्रीय क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा जितनी तेज है उतनी ही मेहनत की आवश्यकता भी बढ़ती जाती है। ऐसे में सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करता है कि वे फिटनेस प्रदर्शन और अनुशासन जैसे क्षेत्रों में लगातार सुधार करते रहें ताकि वे टीम इंडिया के लिए हमेशा भरोसेमंद बने रहें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *