नई दिल्ली :- अगर आपकी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता मिलाकर हर महीने ₹15000 से ज्यादा है तो आपके लिए ईपीएफओ का यह नियम जानना बेहद जरूरी हो जाता है। लंबे समय से नौकरीपेशा लोगों के बीच यह धारणा बनी हुई थी कि हर कंपनी में पीएफ कटना अनिवार्य होता है। लेकिन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने इस विषय पर स्थिति स्पष्ट कर दी है जिससे कई कर्मचारियों को राहत भी मिली है और कई के लिए नई जिम्मेदारी भी सामने आई है।
ईपीएफओ के नियमों के अनुसार जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और डीए मिलाकर ₹15000 से अधिक है उनके लिए पीएफ अपने आप अनिवार्य नहीं होता। ऐसे मामलों में पीएफ कटेगा या नहीं यह कर्मचारी और नियोक्ता की आपसी सहमति पर निर्भर करता है। अगर कर्मचारी पीएफ योजना में शामिल होना चाहता है तो कंपनी उसे मना नहीं कर सकती लेकिन यदि कर्मचारी खुद नहीं चाहता और नियोक्ता भी सहमत है तो पीएफ कटौती से बाहर रहने का विकल्प मौजूद है।
यह नियम खासतौर पर नई नौकरी जॉइन करने वालों के लिए महत्वपूर्ण है। जॉइनिंग के समय कर्मचारी को पीएफ फॉर्म में अपनी सहमति या असहमति दर्ज करनी होती है। एक बार पीएफ खाते में शामिल हो जाने के बाद भविष्य में इससे बाहर निकलना आसान नहीं होता। इसलिए शुरुआत में ही सही फैसला लेना जरूरी माना जाता है।
हालांकि पीएफ से बाहर रहने का मतलब यह नहीं कि भविष्य सुरक्षित नहीं रहेगा। कर्मचारी अपनी सैलरी का उपयोग दूसरी निवेश योजनाओं जैसे म्यूचुअल फंड पेंशन स्कीम या बीमा में कर सकता है। वहीं पीएफ में बने रहने का फायदा यह है कि यह एक सुरक्षित और टैक्स लाभ वाली बचत योजना है जो रिटायरमेंट के समय बड़ी मदद करती है।
इसलिए ₹15000 से अधिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को ईपीएफओ के इस नियम को ठीक से समझकर अपने भविष्य की योजना बनानी चाहिए ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।