नई दिल्ली :- दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी को रोकने के लिए सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। नए कानून के तहत अब कोई भी निजी स्कूल बिना पूरी वित्तीय जानकारी दिए फीस नहीं बढ़ा सकेगा। इस फैसले से लाखों अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है जो लंबे समय से बढ़ती फीस के बोझ से परेशान थे।
इस कानून को उपराज्यपाल वीके सक्सेना की मंजूरी मिल चुकी है। इसका मुख्य उद्देश्य स्कूलों की आय और खर्च में पारदर्शिता लाना है। अब स्कूलों को यह बताना होगा कि फीस बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी और पैसा किन मदों में खर्च किया जाएगा। इससे शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय होगी।
नए प्रावधानों के अनुसार हर स्कूल को फीस बढ़ाने से पहले पेरेंट्स की समिति के सामने पूरा हिसाब प्रस्तुत करना होगा। यदि अभिभावकों को प्रस्तावित बढ़ोतरी उचित नहीं लगती तो वे आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। सरकार द्वारा बनाई गई नियामक व्यवस्था इन आपत्तियों की समीक्षा करेगी और अंतिम फैसला लेगी।
इस कानून से यह भी साफ हो गया है कि स्कूल मनमाने ढंग से अलग अलग शुल्क नहीं जोड़ सकेंगे। किताबें यूनिफॉर्म और अन्य गतिविधियों के नाम पर अतिरिक्त दबाव डालने पर भी रोक लगेगी। इससे मध्यम वर्गीय परिवारों को सीधी राहत मिलेगी।
सरकार का मानना है कि शिक्षा एक सेवा है न कि मुनाफे का साधन। इसी सोच के तहत यह कानून बनाया गया है ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और पेरेंट्स को आर्थिक तनाव का सामना न करना पड़े।
कुल मिलाकर यह कानून दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। इससे स्कूल और अभिभावकों के बीच भरोसा बढ़ेगा और फीस को लेकर होने वाले विवाद कम होंगे। आने वाले समय में इसका असर जमीन पर कितना दिखता है यह देखना अहम होगा।