Care in ICU दिल्ली:- भारत में आईसीयू में ब्रेन डेथ निर्धारण को मानक देखभाल बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केरल सरकार ने ब्रेन डेथ प्रमाणीकरण के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं जो आईसीयू में मरीजों के लिए एक मानक प्रक्रिया बन जाएगी। इस कदम का उद्देश्य ब्रेन डेथ को कार्डियाक डेथ की तरह एक सामान्य और गैस-विवादास्पद मृत्यु की परिभाषा बनाना है जिससे अंग दान और प्रत्यारोपण को बढ़ावा मिल सके। ब्रेन डेथ निर्धारण एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें मरीज की न्यूरोलॉजिकल स्थिति का मूल्यांकन किया जाता है। इसमें मरीज की प्रतिक्रिया, मस्तिष्क के कार्य और श्वसन प्रणाली की जांच शामिल है। यदि मरीज ब्रेन डेथ घोषित किया जाता है तो उसका इलाज बंद कर दिया जाता है और परिवार को अंग दान के विकल्प के बारे में सूचित किया जाता है।
केरल सरकार ने इस प्रक्रिया को मानक बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें डॉक्टरों को प्रशिक्षण प्रदान करना आईसीयू में ब्रेन डेथ निर्धारण के लिए आवश्यक उपकरण और संसाधन प्रदान करना शामिल है। इसके अलावा सरकार ने ब्रेन डेथ प्रमाणीकरण के लिए एक फॉर्म भी विकसित किया है जिसे डॉक्टरों को भरना होगा। इस पहल का उद्देश्य भारत में अंग दान और प्रत्यारोपण को बढ़ावा देना है। ब्रेन डेथ निर्धारण को मानक बनाने से अधिक लोगों को अंग दान करने का अवसर मिलेगा जिससे कई जिंदगियों को बचाया जा सकेगा।
ब्रेन डेथ निर्धारण के लिए आवश्यक कदम
– मरीज की न्यूरोलॉजिकल स्थिति का मूल्यांकन
– मस्तिष्क के कार्य और श्वसन प्रणाली की जांच
– ब्रेन डेथ प्रमाणीकरण के लिए फॉर्म भरना
– परिवार को अंग दान के विकल्प के बारे में सूचित करना
ब्रेन डेथ निर्धारण के लाभ
– अंग दान और प्रत्यारोपण को बढ़ावा
– अधिक लोगों को अंग दान करने का अवसर
– कई जिंदगियों को बचाने में मदद
इस प्रकार आईसीयू में ब्रेन डेथ निर्धारण को मानक देखभाल बनाना एक महत्वपूर्ण कदम है जो अंग दान और प्रत्यारोपण को बढ़ावा देने में मदद करेगा ।