नई दिल्ली :- सोने की कीमतों में लगातार हो रही तेज बढ़ोतरी केवल निवेश का अवसर नहीं बल्कि आने वाले आर्थिक संकट की गंभीर चेतावनी है। जब किसी संपत्ति की कीमत असामान्य गति से ऊपर जाती है तो उसके पीछे सिर्फ मुनाफा कमाने की सोच नहीं होती बल्कि वैश्विक डर और अनिश्चितता छिपी होती है। मौजूदा समय में सोना आम निवेशकों से ज्यादा केंद्रीय बैंकों और बड़े संस्थागत निवेशकों द्वारा खरीदा जा रहा है। यह संकेत देता है कि दुनिया की बड़ी आर्थिक शक्तियां भविष्य को लेकर आशंकित हैं।
चार्टर्ड फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने की कीमत बढ़ना इस बात का संकेत है कि लोगों का भरोसा पारंपरिक निवेश साधनों से कमजोर हो रहा है। पहले संकट के समय लोग डॉलर और सरकारी बॉन्ड को सुरक्षित मानते थे लेकिन अब यह भरोसा धीरे धीरे सोने की ओर शिफ्ट हो रहा है। जब लोग किसी देश की करेंसी या वित्तीय व्यवस्था पर भरोसा खोने लगते हैं तब वे ऐसी संपत्ति चुनते हैं जिस पर किसी सरकार का सीधा नियंत्रण न हो।
सोने की कीमत में तेजी यह भी दर्शाती है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था किसी बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। केंद्रीय बैंक सोना इसलिए जमा कर रहे हैं ताकि किसी बड़े झटके की स्थिति में अपनी अर्थव्यवस्था को संभाल सकें। संस्थागत निवेशक भी अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने के लिए सोने की ओर झुक रहे हैं। यह स्थिति बताती है कि आने वाला समय अस्थिर हो सकता है।
पिछले एक साल में सोने की कीमत में जबरदस्त उछाल देखा गया है। चीन और भारत जैसे देश जो पहले सोना बेचने की स्थिति में थे अब अपने गोल्ड रिजर्व को तेजी से बढ़ा रहे हैं। इसका मुख्य कारण डॉलर पर निर्भरता को कम करना है। सोने की यह दौड़ साफ संकेत देती है कि दुनिया आर्थिक संतुलन के नए रास्ते तलाश रही है।
इसलिए महंगा सोना खुशी की खबर नहीं बल्कि सतर्क रहने का संदेश है। यह हमें बताता है कि वैश्विक आर्थिक ढांचे में गहरी हलचल चल रही है और आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है।