FERA Cases नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 25 साल पहले निरस्त किए गए विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (फेरा) के तहत दर्ज मामलों को जल्द से जल्द निपटाने का फैसला किया है। ईडी के निदेशक राहुल नवीने गुजरात में एक सम्मेलन के दौरान अधिकारियों को पुराने फेरा मामलों को तेजी से निपटाने के निर्देश दिए हैं । ईडी के अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने लगभग 400-500 मामलों की पहचान की है जिनमें अभियुक्त व्यक्ति या तो मर चुके हैं या उनका पता नहीं चल पा रहा ह या जिन संपत्तियों का मामला है, वे बेच दी गई हैं या अब मौजूद नहीं हैं। इन मामलों को जल्द से जल्द निपटाने का लक्ष्य है और उम्मीद है कि यह प्रक्रिया 2026 की पहली तिमाही तक पूरी हो जाएगी।
फेरा को 1999 में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) से बदल दिया गया था, जो एक सिविल कानून है। फेमा विदेशी मुद्रा के प्रबंधन पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है न कि इसके नियमन और नियंत्रण पर। फेमा के तहत अधिकांश उल्लंघनों को नागरिक अपराध माना जाता है जबकि फेरा के तहत उन्हें आपराधिक अपराध माना जाता था। ईडी के इस फैसले से दो दशकों से अधिक समय से चल रहे पुराने फेरा मामलों को निपटाने में मदद मिलेगी और एजेंसी के कामकाज में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी ।