नई दिल्ली :- दिल्ली एनसीआर एक बार फिर गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में आ गया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि राजधानी और आसपास के इलाकों में हवा सांस लेने लायक नहीं रह गई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है जिससे आम लोगों की सेहत पर सीधा असर पड़ रहा है। सुबह के समय आसमान में धुंध की मोटी चादर दिखाई दे रही है और सड़कों पर दृश्यता काफी कम हो गई है।
प्रदूषण के इस बढ़ते स्तर के पीछे प्रतिकूल मौसम को बड़ा कारण माना जा रहा है। हवा की रफ्तार धीमी होने से प्रदूषक तत्व वातावरण में ही फंसे हुए हैं। वाहनों का धुआं निर्माण कार्यों से उड़ती धूल और आसपास के इलाकों में पराली जलाने की घटनाएं स्थिति को और गंभीर बना रही हैं। कई इलाकों में लोगों को आंखों में जलन गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत हो रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की जहरीली हवा बच्चों बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। अस्पतालों में सांस संबंधी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि लोग बिना जरूरत घर से बाहर न निकलें और अगर निकलना जरूरी हो तो मास्क का इस्तेमाल जरूर करें।
सरकारी एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और कुछ इलाकों में एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। निर्माण गतिविधियों पर रोक और वाहनों के उपयोग को सीमित करने जैसे उपायों पर विचार किया जा रहा है। इसके बावजूद हालात में तुरंत सुधार के संकेत नहीं दिख रहे हैं।
दिल्ली एनसीआर के लोगों के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया है। साफ हवा अब एक सपना सी लगने लगी है। जब तक मौसम में बदलाव नहीं होता और प्रदूषण के स्रोतों पर सख्ती से नियंत्रण नहीं किया जाता तब तक राहत मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। ऐसे में सावधानी ही इस समय सबसे बड़ा बचाव है।