नई दिल्ली :- दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगाए गए विवादित नारों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसके बाद राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। रैली में मौजूद कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए नारों को लेकर भाजपा ने कड़ा ऐतराज जताया है और इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि इस तरह के नारे कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति को उजागर करते हैं। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस के पास जनता से जुड़े मुद्दों का अभाव है और इसी वजह से वह व्यक्तिगत हमलों का सहारा ले रही है। भाजपा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ इस तरह की भाषा देश की राजनीतिक संस्कृति को नुकसान पहुंचाती है और इसका जवाब जनता आने वाले समय में देगी।
कांग्रेस की ओर से इस मामले पर सफाई भी सामने आई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि रैली का उद्देश्य जनहित के मुद्दों को उठाना था और किसी भी तरह के अपमानजनक नारे पार्टी की आधिकारिक लाइन नहीं हैं। कांग्रेस ने यह भी कहा कि भाजपा इस मुद्दे को बेवजह तूल देकर असली सवालों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। बेरोजगारी महंगाई और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय विवाद को बढ़ाया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल नजदीक आते ही इस तरह की घटनाएं और तेज होंगी। सोशल मीडिया के दौर में छोटे से छोटे घटनाक्रम भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन जाते हैं। इससे राजनीतिक दलों पर अपनी रैलियों और कार्यक्रमों में अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
यह पूरा मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या राजनीतिक असहमति को शालीन भाषा में व्यक्त किया जा सकता है। लोकतंत्र में विरोध जरूरी है लेकिन उसकी मर्यादा भी उतनी ही अहम है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद राजनीति की दिशा को किस तरह प्रभावित करता है और क्या राजनीतिक दल इससे कोई सीख लेते हैं।