Hidden Toxic दिल्ली:- एक नए अध्ययन के अनुसार भारतीय शहरों की हवा में माइक्रोप्लास्टिक्स की मात्रा बढ़ रही जो मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है। यह अध्ययन भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) कोलकाता द्वारा किया गया है जिसमें पाया गया है कि माइक्रोप्लास्टिक्स अब शहरों की हवा में 5% तक प्रदूषण का कारण बन रहे हैं ।
माइक्रोप्लास्टिक्स क्या हैं?
माइक्रोप्लास्टिक्स छोटे प्लास्टिक कण होते हैं जो 5 मिलीमीटर से कम आकार के होते हैं। ये प्लास्टिक कण वातावरण में फैल जाते हैं और मानव श्वसन के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।
माइक्रोप्लास्टिक्स के स्रोत
माइक्रोप्लास्टिक्स के स्रोतों में शामिल हैं:
– सिंथेटिक कपड़े: सिंथेटिक कपड़ों से निकलने वाले माइक्रोफाइबर
– प्लास्टिक पैकेजिंग: प्लास्टिक पैकेजिंग से निकलने वाले माइक्रोप्लास्टिक्स
– टायर और फुटवेयर: टायर और फुटवेयर से निकलने वाले माइक्रोप्लास्टिक्स
– कॉस्मेटिक्स: कॉस्मेटिक्स में उपयोग होने वाले माइक्रोप्लास्टिक्स
माइक्रोप्लास्टिक्स के प्रभाव
माइक्रोप्लास्टिक्स के प्रभावों में शामिल हैं:
– श्वसन समस्याएं: माइक्रोप्लास्टिक्स श्वसन समस्याएं पैदा कर सकते हैं
– कैंसर: माइक्रोप्लास्टिक्स कैंसर का कारण बन सकते हैं
– हॉर्मोनल असंतुन: माइक्रोप्लास्टिक्स हॉर्मोनल असंतुलन पैदा कर सकते हैं
क्या किया जा सकता है?
माइक्रोप्लास्टिक्स के प्रभावों को कम करने के लिए हमें निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:
– सिंथेटिक कपड़ों का उपयोग कम करें: सिंथेटिक कपड़ों का उपयोग कम करें और प्राकृतिक कपड़ों का उपयोग करें
– प्लास्टिक पैकेजिंग का उपयोग कम करें:प्लास्टिक पैकेजिंग का उपयोग कम करें और पुनर्चक्रण करें
– टायर और फुटवेयर का उपयोग कम करें: टायर और फुटवेयर का उपयोग कम करें और पर्यावरण अनुकूल विकल्पों का उपयोग करें
यह अध्ययन हमें माइक्रोप्लास्टिक्स के प्रभावों के बारे में जागरूक करता है और हमें अपने पर्यावरण की रक्षा करने के लिए कदम उठाने के लिए प्रेरित करता है।