Rupee falls दिल्ली:- भारतीय रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.83 पर पहुंच गया जो एक नया निचला स्तर है। यह लगातार पांचवें दिन गिरावट है और रुपया इस साल अब तक 1.2% गिर चुका है।
रुपये की गिरावट के कारणों में से एक है अमेरिकी डॉलर की मजबूती, जो वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में भी कमी आई है, जो रुपये की गिरावट का एक अन्य कारण है रुपये की गिरावट से आयातकों को झटका लगेगा क्योंकि उन्हें डॉलर में भुगतान करना होगा। इसके अलावा यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय है क्योंकि यह आयातित वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का कारण बन सकता है।
रुपये की गिरावट के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अभी तक कोई हस्तक्षेप नहीं किया है। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि वे रुपये की गिरावट पर नजर रखे हुए हैं और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करेंगे रुपये की गिरावट से निपटने के लिए सरकार और आरबीआई को मिलकर काम करना होगा। सरकार को आयात को कम करने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने होंगे, जबकि आरबीआई को रुपये की गिरावट को रोकने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि करनी पड़ सकती है ।