Rupee falls दिल्ली:- भारतीय रुपया आज 16 दिसंबर 2025 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक नए निचले स्तर पर पहुंच गया है पहली बार 91 के पार निकल गया है। यह गिरावट विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार निकासी और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अनिश्चितता के कारण हुई है ।
रुपया आज 36 पैसे गिरकर 91.0750 पर पहुंच गया जो इसके पिछले सत्र के 90.78 के स्तर से काफी नीचे है। यह गिरावट लगातार चौथे सत्र में हुई है जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण एफआईआई की निकासी और व्यापार समझौते पर अनिश्चितता है। इसके अलावा, अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी रुपये पर दबाव डाल रही है।
रुपये की गिरावट के प्रभाव
रुपये की गिरावट से आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं जिससे महंगाई बढ़ सकती है। इसके अलावा यह देश के व्यापार घाटे को भी बढ़ा सकता है जिससे अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की गिरावट अभी भी जारी रह सकती है क्योंकि एफआईआई की निकासी और व्यापार समझौते पर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की गिरावट से निर्यातकों को लाभ हो सकता हैbजिससे अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिल सकती है।
अनुमानित भविष्य
विशेषज्ञों का अनुमान है कि रुपये की गिरावट अभी भी जारी रह सकती है यह जल्द ही स्थिर हो सकता है। इसके अलावा सरकार और रिजर्व बैंक द्वारा उठाए गए कदमों से भी रुपये को समर्थन मिल सकता है ।