नई दिल्ली :- भारत के महान मूर्तिकार और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाकर विश्व स्तर पर पहचान बनाने वाले राम सुतार का बुधवार 17 दिसंबर को निधन हो गया। उम्र से जुड़ी बीमारियों से लंबे समय से जूझ रहे राम सुतार ने अपने निवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से कला जगत ही नहीं बल्कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।
राम सुतार भारतीय मूर्तिकला के ऐसे स्तंभ थे जिन्होंने अपने काम से इतिहास रच दिया। सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को आकार देकर उन्होंने भारत को विश्व मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाई। यह प्रतिमा न केवल दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है बल्कि भारतीय शिल्पकला की अद्भुत मिसाल भी मानी जाती है।
1925 में जन्मे राम सुतार ने बेहद साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति हासिल की। उन्होंने अपने लंबे करियर में हजारों मूर्तियों का निर्माण किया जिनमें महात्मा गांधी डॉ भीमराव आंबेडकर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी महान विभूतियों की प्रतिमाएं शामिल हैं। उनकी कला में भारतीय संस्कृति इतिहास और संवेदनाओं की गहरी झलक देखने को मिलती थी।
राम सुतार को उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। उन्हें पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे बड़े सम्मानों से भी नवाजा गया। उनकी सादगी और काम के प्रति समर्पण युवा कलाकारों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहा।
प्रधानमंत्री और कई राजनीतिक नेताओं कलाकारों और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें भारतीय कला का अमूल्य रत्न बताते हुए कहा कि उनकी कमी कभी पूरी नहीं की जा सकेगी।राम सुतार भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी बनाई मूर्तियां आने वाली पीढ़ियों को भारतीय इतिहास और कला की महानता का एहसास कराती रहेंगी। उनका योगदान भारतीय संस्कृति में हमेशा अमर रहेगा।