नई दिल्ली :- कांग्रेस पार्टी के भीतर इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चलने के संकेत मिल रहे हैं। इसी बीच सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि राहुल गांधी अपने ही परिवार और पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं से नाराज होकर विदेश चले गए हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन इस खबर ने राजनीतिक हलकों में हलचल जरूर मचा दी है।
सूत्रों के मुताबिक पार्टी के अंदर फैसलों को लेकर मतभेद लगातार सामने आ रहे हैं। संगठनात्मक बदलाव नेतृत्व की भूमिका और आगामी रणनीति को लेकर कांग्रेस में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी लंबे समय से पार्टी के कामकाज और आंतरिक राजनीति से संतुष्ट नहीं थे। इसी नाराजगी के बीच उनका विदेश जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।
राहुल गांधी इससे पहले भी निजी कारणों और राजनीतिक ब्रेक के दौरान विदेश जाते रहे हैं। लेकिन मौजूदा समय में उनका यूं अचानक बाहर जाना इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पार्टी कई राज्यों में चुनावी चुनौतियों से जूझ रही है। विपक्षी दल इसे कांग्रेस की कमजोरी और नेतृत्व संकट के तौर पर पेश कर रहे हैं।
कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि राहुल गांधी का विदेश जाना कोई नई बात नहीं है और इसे बेवजह तूल दिया जा रहा है। उनका तर्क है कि राहुल गांधी रणनीति और आत्ममंथन के लिए समय लेते रहते हैं और लौटकर फिर सक्रिय राजनीति में उतरते हैं। पार्टी नेताओं का दावा है कि कांग्रेस एकजुट है और आंतरिक मतभेदों को लोकतांत्रिक तरीके से सुलझाया जा रहा है।
वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बार बार इस तरह की खबरें सामने आना कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचाता है। इससे कार्यकर्ताओं में भ्रम और निराशा पैदा होती है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि राहुल गांधी की यह विदेश यात्रा महज व्यक्तिगत है या इसके पीछे पार्टी की गहरी अंदरूनी राजनीति की वजह छिपी हुई है।
फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व की ओर से चुप्पी बनी हुई है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राहुल गांधी की वापसी के बाद पार्टी में क्या बदलाव देखने को मिलते हैं।