असम :- असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य की मौजूदा जनसंख्या स्थिति को लेकर बेहद गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि असम आज एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है जहां जनसांख्यिकीय संतुलन तेजी से बदल रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य में बांग्लादेशी मूल के लोगों की संख्या बढ़कर लगभग चालीस प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह स्थिति सामाजिक संरचना और कानून व्यवस्था दोनों के लिए खतरे की घंटी है।
मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि असम एक बारूद के ढेर पर बैठा है। यदि समय रहते ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में हालात और ज्यादा विस्फोटक हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध घुसपैठ केवल सीमावर्ती जिलों तक सीमित नहीं रही है बल्कि इसका असर राज्य के भीतर तक फैल चुका है। कई क्षेत्रों में स्थानीय लोग अपने ही इलाके में अल्पसंख्यक होते जा रहे हैं जिससे असंतोष और भय का माहौल बन रहा है।
हिमंता बिस्वा सरमा ने प्रशासनिक आंकड़ों और जनसंख्या रुझानों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ जिलों में जनसंख्या वृद्धि की दर असामान्य है। यह वृद्धि प्राकृतिक नहीं लगती और इसके पीछे अवैध प्रवासन एक बड़ा कारण है। उन्होंने बताया कि इसका सीधा प्रभाव जमीन रोजगार और सरकारी संसाधनों पर पड़ रहा है। इससे स्थानीय युवाओं में नाराजगी बढ़ रही है और सामाजिक तनाव गहरा रहा है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार और देश की सुरक्षा एजेंसियों से इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक बहस का विषय नहीं है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा है। सीमा प्रबंधन को मजबूत करना पहचान की सख्त जांच करना और अवैध घुसपैठ पर रोक लगाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
असम की बदलती जनसंख्या पर यह बयान पूरे देश में नई चर्चा को जन्म दे रहा है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर बड़े नीतिगत और प्रशासनिक फैसले लिए जाने की संभावना है।