योगी सरकार का बड़ा फैसला मदरसा शिक्षकों से जुड़ा पुराना विधेयक समाप्त

 

लखनऊ (उत्तर प्रदेश):- उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक अहम और दूरगामी फैसला लेते हुए मदरसा शिक्षकों से जुड़े उस विधेयक को रद्द कर दिया है जिसे समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में पारित किया गया था। इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कानून व्यवस्था को अधिक स्पष्ट बनाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है।

राज्य सरकार के अनुसार पूर्ववर्ती सरकार के समय जो विधेयक लाया गया था उसका उद्देश्य मदरसा शिक्षकों को विशेष संरक्षण देना था। हालांकि वर्तमान सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था समान शिक्षा नीति और पारदर्शी प्रशासनिक ढांचे के अनुरूप नहीं थी। योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक समान नियम होने चाहिए।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि पुराने विधेयक के चलते कई बार नियुक्ति प्रक्रिया और मानकों को लेकर सवाल खड़े हुए। इससे शिक्षा की गुणवत्ता और जवाबदेही पर असर पड़ने की आशंका बनी रहती थी। इसी को ध्यान में रखते हुए विधेयक को निरस्त करने का निर्णय लिया गया है।

विपक्ष ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। समाजवादी पार्टी का कहना है कि यह कदम मदरसा शिक्षकों के अधिकारों पर सीधा हमला है। उनका आरोप है कि सरकार एक खास वर्ग को निशाना बना रही है और शिक्षा को राजनीति का विषय बनाया जा रहा है।

वहीं सरकार समर्थकों का तर्क है कि यह फैसला किसी समुदाय के खिलाफ नहीं बल्कि व्यवस्था में समानता लाने के लिए है। उनका कहना है कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार तभी संभव है जब सभी संस्थानों पर एक जैसे नियम लागू हों और किसी को भी विशेष छूट न दी जाए।

कुल मिलाकर यह निर्णय उत्तर प्रदेश की राजनीति और शिक्षा नीति दोनों में नई बहस को जन्म दे रहा है। आने वाले समय में इसका असर मदरसा शिक्षा व्यवस्था और राज्य की सियासत पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।

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