नई दिल्ली :- दिल्ली एक बार फिर गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में है। बुधवार सुबह राजधानी ने जहरीली हवा के साथ दिन की शुरुआत की। शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 349 दर्ज किया गया जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। दिल्ली के करीब सत्तर प्रतिशत इलाकों में हालात और भी चिंताजनक बने हुए हैं जहां AQI गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। ठंड के बढ़ते प्रभाव और हवा की रफ्तार लगभग शून्य रहने से प्रदूषक कण वातावरण में ही फंसे हुए हैं।
हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण खतरनाक सीमा को पार कर चुके हैं। इन कणों का असर सीधे फेफड़ों और हृदय पर पड़ता है। डॉक्टरों के अनुसार बच्चों बुजुर्गों और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक है। अस्पतालों में खांसी आंखों में जलन और सांस फूलने की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं निर्माण कार्यों की धूल और आसपास के राज्यों में पराली जलाने का असर दिल्ली की हवा पर साफ दिख रहा है। इसके साथ ही मौसम की स्थिरता ने हालात को और बिगाड़ दिया है। सूर्य की रोशनी कम होने से प्रदूषक कण ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं और निचली सतह पर ही जमा हो रहे हैं।
सरकार और प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। खुले में सुबह की सैर और व्यायाम से बचने को कहा गया है। स्कूलों में बच्चों की गतिविधियों पर भी निगरानी बढ़ाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक तेज हवा या बारिश नहीं होती तब तक राहत मिलना मुश्किल है।
दिल्ली की यह स्थिति एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम कब उठाए जाएंगे। हर साल यही संकट दोहराया जाता है और आम जनता को इसका खामियाजा अपनी सेहत से चुकाना पड़ता है।