नई दिल्ली :- डिजिटल दौर में DigiLocker आम लोगों की जरूरत बन चुका है। आधार कार्ड ड्राइविंग लाइसेंस पैन कार्ड जैसे अहम दस्तावेज रखने के लिए लाखों लोग इस ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन इसी भरोसे का फायदा अब साइबर अपराधी उठा रहे हैं। DigiLocker जैसे दिखने वाले फर्जी ऐप बनाकर लोगों का पर्सनल डेटा पहचान और बैंकिंग जानकारी चुराई जा रही है। ऐसे में जरूरी है कि आप तुरंत जांच करें कि आपके फोन में असली ऐप है या नकली।
साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक फर्जी DigiLocker ऐप देखने में बिल्कुल असली जैसा होता है। लोग बिना ध्यान दिए इसे डाउनलोड कर लेते हैं और लॉगिन करते ही उनकी निजी जानकारी अपराधियों के हाथ लग जाती है। इसके जरिए ओटीपी बैंक डिटेल्स और डॉक्यूमेंट्स तक चोरी किए जा सकते हैं।
सबसे पहले DigiLocker ऐप की पहचान करें। असली DigiLocker ऐप भारत सरकार के MeitY यानी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है। Google Play Store या Apple App Store पर ऐप का डेवलपर नाम National eGovernance Division होना चाहिए। अगर डेवलपर का नाम अलग है तो समझ जाएं ऐप फर्जी है।
दूसरा तरीका है ऐप के डाउनलोड और रिव्यू चेक करना। असली DigiLocker के करोड़ों डाउनलोड और हजारों रिव्यू होते हैं। फर्जी ऐप में डाउनलोड कम होते हैं और रिव्यू या तो नहीं होते या शिकायतों से भरे होते हैं।
तीसरा संकेत है परमिशन। DigiLocker जरूरत से ज्यादा परमिशन नहीं मांगता। अगर कोई ऐप कैमरा कांटैक्ट माइक्रोफोन या मैसेज की अनावश्यक अनुमति मांग रहा है तो सतर्क हो जाएं।
अगर गलती से आपने फर्जी ऐप इंस्टॉल कर लिया है तो तुरंत उसे अनइंस्टॉल करें। इसके बाद फोन का सिक्योरिटी स्कैन करें सभी पासवर्ड बदलें और बैंक को अलर्ट करें। जरूरत पड़ने पर cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें और किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। थोड़ी सी सतर्कता आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है।