इस्लामाबाद (पाकिस्तान):- पाकिस्तान की सियासत में उस समय भूचाल आ गया जब जमीयत उलेमा ए इस्लाम फजल के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सेना और सरकार पर तीखा हमला बोला। कराची के ल्यारी इलाके में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मौलाना रहमान ने सीधे तौर पर पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व और सत्ता के दोहरे रवैये पर सवाल खड़े कर दिए। उनके बयान को सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के लिए खुली चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
मौलाना रहमान ने कहा कि पाकिस्तान की नीतियां पूरी तरह विरोधाभासी हैं। उन्होंने अफगानिस्तान का जिक्र करते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान वहां कार्रवाई कर सकता है तो फिर यही तर्क भारत के संदर्भ में क्यों लागू नहीं होता। उन्होंने काबुल हमले का उदाहरण देते हुए कहा कि जब हम दूसरे देश की सरजमीं पर हमला कर सकते हैं तो फिर यह सवाल उठता है कि भारत पाकिस्तान के अंदर ऐसा क्यों नहीं कर सकता। इस बयान के बाद सभा में सन्नाटा छा गया और फिर जोरदार नारेबाजी शुरू हो गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सत्ता में बैठे लोग जनता को गुमराह कर रहे हैं। एक तरफ राष्ट्रवाद और सुरक्षा की बातें की जाती हैं तो दूसरी तरफ नीतियां बिल्कुल उलट दिशा में चलती हैं। मौलाना रहमान ने कहा कि सेना और सरकार को जवाब देना होगा कि देश को किस दिशा में ले जाया जा रहा है।
इस बयान के बाद पाकिस्तानी राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विरोधी दलों ने भी इस मुद्दे को हाथोंहाथ लिया है और सरकार से जवाब की मांग की जा रही है। वहीं सत्तारूढ़ खेमे में इस बयान को गैर जिम्मेदाराना बताया जा रहा है और मौलाना रहमान पर देश की सुरक्षा को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान पाकिस्तान में बढ़ते राजनीतिक असंतोष और सत्ता संघर्ष को दर्शाता है। आर्थिक संकट और जन असंतोष के बीच इस तरह के बयान हालात को और तनावपूर्ण बना सकते हैं।
कुल मिलाकर ल्यारी से दिया गया मौलाना फजलुर रहमान का यह बयान न सिर्फ पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति को झकझोर रहा है बल्कि सेना और राजनीतिक नेतृत्व के बीच बढ़ती खाई को भी उजागर कर रहा है। आने वाले दिनों में इस बयान के असर और प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।