Aravalli दिल्ली:- भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने नवंबर 2025 में अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया, जिसमें 100 मीटर की ऊंचाई को मानक माना गया है। हालांकि, यह निर्णय 2010 में खारिज की गई परिभाषा के विपरीत है, जब अदालत ने अरावली पहाड़ियों की पहचान के लिए 3 डिग्री की ढलान को मानक माना था ।
2010 में राजस्थान सरकार ने अरावली पहाड़ियों को परिभाषित करने के लिए 100 मीटर की ऊंचाई को मानक माना थाnजिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। अदालत ने फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई) को निर्देश दिया था कि वह अरावली पहाड़ियों की पहचान के लिए एक व्यापक सर्वेक्षण करे जिसमें 100 मीटर की ऊंचाई को मानक नहीं माना जाए। हालांकि नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने 100 मीटर की ऊंचाई को मानक मानते हुए एक नए निर्णय को स्वीकार किया है जिसे पर्यावरणविदों और कार्यकर्ताओं ने चिंताजनक माना है। उनका कहना है कि यह निर्णय अरावली पहाड़ियों के संरक्षण के लिए हानिकारक हो सकता है क्योंकि इससे 90% से अधिक पहाड़ियां संरक्षण से बाहर हो सकती हैं।