Hailing Tilak दिल्ली:-भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के पहले सम्मेलन के अध्यक्ष एम. सिंगारवेलु ने 1925 में अपने भाषण में महात्मा गांधी की खादी नीति की आलोचना की और लोकमान्य तिलक की प्रशंसा की। सिंगारवेलु ने कहा कि खादी आंदोलन एक “समस्यात्मक” विचार है और यह गरीबों के लिए है।
सिंगारवेलु ने कहा कि कांग्रेस एक “बुर्जुआ” पार्टी है और यह श्रमिकों और किसानों के अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि सीपीआई का उद्देश्य श्रमिकों और किसानों के अधिकारों की रक्षा करना और भारत को ब्रिटिश साम्राज्य से मुक्त करना है । सिंगारवेलु ने लेनिन और तिलक की प्रशंसा की और कहा कि वे दोनों महान नेता थे जिन्होंने अपने देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा कि सीपीआई का उद्देश्य भारत को एक साम्यवादी देश बनाना है जहां सभी लोगों को समान अधिकार है ।
सीपीआई के इतिहास पर एक नजर
सीपीआई की स्थापना 1925 में कानपुर में हुई थी। पार्टी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और श्रमिकों और किसानों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। सीपीआई ने कई महत्वपूर्ण आंदोलनों में भाग लिया जिनमें तेभागा आंदोलन और तेलंगाना आंदोलन शामिल हैं।