SIR पश्चिम बंगाल:- पश्चिम बंगाल में मातुआ समुदाय के बीच केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के एक बयान ने तनाव बढ़ा दिया है। ठाकुर ने कहा कि अगर 50 लाख मुसलमानों को मतदाता सूची से हटाने के लिए 1 लाख मातुआओं के नाम हटाने पड़ें, तो यह एक “सहनीय” नुकसान होगा। इस बयान के बाद मातुआ समुदाय के बीच आक्रोश फैल गया है और बीजेपी के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
मातुआ समुदाय पश्चिम बंगाल में एक महत्वपूर्ण वोट बैंक है जिसकी संख्या लगभग 30 लाख है। इस समुदाय के लोग मुख्य रूप से बांग्लादेश से आए शरणार्थी हैं और उनकी राजनीतिक लोंगो में महत्वपूर्ण भूमिका है। बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में मातुआ समुदाय के समर्थन से 18 सीटें जीती थीं शांतनु ठाकुर के बयान के बाद मातुआ समुदाय के बीच विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। तृणमूल कांग्रेस ने भी बीजेपी पर हमला बोला है और कहा है कि यह बयान मातुआ समुदाय के प्रति बीजेपी की वास्तविक सोच को दर्शाता है।
मातुआ समुदाय की चिंताएं
मातुआ समुदाय के लोग अपनी नागरिकता और मताधिकार को लेकर चिंतित हैं। उन्हें डर है कि वे अपनी नागरिकता खो सकते हैं और उनके मताधिकार पर खतरा हो सकता है। शांतनु ठाकुर के बयान ने इन चिंताओं को और बढ़ा दिया है ।
बीजेपी की प्रतिक्रिया
बीजेपी ने शांतनु ठाकुर के बयान को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं ने कहा है कि यह बयान मातुआ समुदाय के समर्थन में है और उन्हें नागरिकता देने के लिए है।