गुलमर्ग का सेंट मैरी चर्च जहां आस्था से ज्यादा इंसानियत की होती है पूजा

श्रीनगर (जम्मू कश्मीर):- कश्मीर की वादियों में बसा गुलमर्ग सिर्फ अपनी बर्फीली खूबसूरती के लिए ही नहीं बल्कि आपसी भाईचारे की मिसालों के लिए भी जाना जाता है। यहां स्थित 123 साल पुराना सेंट मैरी चर्च अपनी अनोखी पहचान के कारण देश और दुनिया में खास स्थान रखता है। यह चर्च केवल ईसाई आस्था का केंद्र नहीं बल्कि इंसानियत और आपसी सम्मान का मजबूत प्रतीक भी है।

 

इस चर्च की सबसे खास बात यह है कि इसकी देखभाल एक मुस्लिम परिवार करता है। मुजफ्फर अहमद कई वर्षों से सेंट मैरी चर्च की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वे चर्च की साफ सफाई सुरक्षा और रखरखाव का काम पूरी ईमानदारी से करते हैं। मुजफ्फर का कहना है कि यह जगह उनके लिए किसी धार्मिक भेद से ऊपर है और इसे संभालना उनका नैतिक कर्तव्य है। उनके अनुसार धर्म अलग हो सकते हैं लेकिन इंसानियत सभी को जोड़ती है।

 

क्रिसमस के अवसर पर सेंट मैरी चर्च में विशेष प्रार्थनाओं का आयोजन किया जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इस साल गुलमर्ग में व्हाइट क्रिसमस मनाया गया और चारों ओर बर्फ से ढकी वादियों के बीच चर्च का दृश्य बेहद आकर्षक नजर आया। प्रार्थना के दौरान शांति और भाईचारे का संदेश फैलता रहा।

 

स्थानीय लोगों के लिए यह चर्च गर्व का विषय है। उनका मानना है कि यही कश्मीर की असली पहचान है जहां हर धर्म को सम्मान दिया जाता है। सेंट मैरी चर्च सदियों से इस साझा संस्कृति का प्रतीक बना हुआ है।

आज के समय में जब दुनिया में धार्मिक तनाव की खबरें आम हैं तब गुलमर्ग का यह चर्च एक सकारात्मक संदेश देता है। यह बताता है कि प्रेम सौहार्द और इंसानियत से ही समाज मजबूत बनता है।

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