नई दिल्ली :- भारत में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अब इसके उपयोग को लेकर सख्त नियम बनाने की तैयारी तेज हो गई है। जिस तरह ऑस्ट्रेलिया में आर्मी से लेकर आम नागरिकों तक सोशल मीडिया उपयोग के लिए स्पष्ट और कड़े दिशा निर्देश लागू किए गए हैं उसी तर्ज पर भारत में भी नई पॉलिसी लाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा सामाजिक सौहार्द और डिजिटल अनुशासन को मजबूत करना बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार खास तौर पर सेना और सुरक्षा बलों के लिए सोशल मीडिया उपयोग को लेकर पहले से ही कई प्रतिबंध हैं लेकिन अब इन्हें और स्पष्ट और सख्त किया जा सकता है। सैन्य ठिकानों गतिविधियों और व्यक्तिगत जानकारी को साझा करने पर पूर्ण प्रतिबंध जैसे नियमों को और प्रभावी बनाने की योजना है। इसके साथ ही आम नागरिकों के लिए भी जिम्मेदार सोशल मीडिया व्यवहार को लेकर दिशानिर्देश तैयार किए जा सकते हैं।
सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग अफवाह फेक न्यूज और देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां भ्रामक सूचनाओं के कारण सामाजिक तनाव और कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी। ऐसे में नई पॉलिसी के जरिए जवाबदेही तय करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया जा सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में लागू नीति के तहत सरकारी कर्मचारी और सेना से जुड़े लोग क्या पोस्ट कर सकते हैं और क्या नहीं इसका स्पष्ट खाका तय किया गया है। भारत में भी इसी तरह वर्ग विशेष के लिए अलग अलग नियम बन सकते हैं। स्कूल कॉलेज और दफ्तरों में भी डिजिटल साक्षरता और सोशल मीडिया एथिक्स को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि नियम बनाते समय अभिव्यक्ति की आजादी का संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। बहुत अधिक सख्ती से आम लोगों में असंतोष भी पैदा हो सकता है। इसलिए सरकार सभी पक्षों से सलाह लेकर एक व्यावहारिक और प्रभावी नीति लाने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर यह साफ है कि आने वाले समय में भारत में सोशल मीडिया उपयोग पहले से अधिक नियंत्रित और जिम्मेदार होने वाला है। यह बदलाव देश की सुरक्षा और समाज की स्थिरता के लिए एक अहम कदम साबित हो सकता है।