INSV Kaundinya नई दिल्ली:-भारतीय नौसेना ने समुद्री इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए अपने नवीनतम नौकायन जहाज INSV कौंडिन्य (INSV Kaundinya) को उसकी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए रवाना कर दिया है। यह जहाज गोवा के तट से ओमान के मस्कट शहर तक की साहसिक यात्रा पर निकला है। इस मिशन की सबसे खास बात यह है कि यह एक ‘इंजन-रहित’ (Engineless) पाल वाला जहाज है, जो पूरी तरह से हवा की शक्ति और चालक दल के कौशल पर निर्भर है।
स्वदेशी क्षमता का प्रतीक
INSV कौंडिन्य भारतीय नौसेना के ‘तारिणी’ और ‘महादेई’ जैसे प्रसिद्ध जहाजों की विरासत को आगे बढ़ा रहा है। इसे भारत में ही डिजाइन और निर्मित किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को दर्शाता है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य न केवल समुद्री कौशल का प्रदर्शन करना है, बल्कि पारंपरिक नेविगेशन तकनीकों को पुनर्जीवित करना भी है।
यात्रा की चुनौतियाँ और मार्ग
यह यात्रा लगभग 1,300 समुद्री मील (Nautical Miles) लंबी है। चूंकि इसमें इंजन का उपयोग नहीं किया जा रहा है, इसलिए चालक दल को अरब सागर की बदलती लहरों और हवा की दिशाओं के साथ तालमेल बिठाना होगा।
प्रस्थान: आईएनएस मांडोवी, गोवा।
गंतव्य: मस्कट, ओमान।
उद्देश्य: समुद्री कूटनीति को मजबूत करना और इको-फ्रेंडली समुद्री परिवहन को बढ़ावा देना।
साहसी चालक दल
इस ऐतिहासिक यात्रा का नेतृत्व अनुभवी अधिकारियों की एक टीम कर रही है। चालक दल में महिला और पुरुष दोनों अधिकारी शामिल हैं जो पर्यावरण के अनुकूल इस मिशन के जरिए दुनिया को स्थिरता (Sustainability) का संदेश दे रहे हैं। यात्रा के दौरान टीम खगोलीय गणनाओं (Celestial Navigation) और हवा के रुख का उपयोग करके अपना रास्ता तय करेगी।
कूटनीतिक महत्व
भारत और ओमान के बीच संबंध सदियों पुराने हैं। ‘कौंडिन्य’ की यह यात्रा प्राचीन व्यापारिक मार्गों की याद दिलाती है जब भारतीय नाविक बिना किसी आधुनिक मशीनरी के सुदूर देशों की यात्रा करते थे। यह मिशन दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने का एक जरिया है।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ यह जहाज भविष्य के समुद्री अभियानों के लिए एक मिसाल पेश कर रहा है। नौसेना के अनुसार यह यात्रा कैडेटों के बीच टीम वर्क और शारीरिक-मानसिक मजबूती को परखने का एक बेहतरीन माध्यम है।