राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह के बीच राजनीतिक हलचल

नई दिल्ली :- कांग्रेस पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर एक दिलचस्प राजनीतिक प्रसंग सामने आया जिसने सियासी गलियारों में चर्चा तेज कर दी। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के एक हालिया बयान को लेकर कांग्रेस नेतृत्व में असहजता देखी गई। दिग्विजय सिंह ने आरएसएस और भाजपा के आपसी तालमेल की सराहना करते हुए यह कहा था कि कांग्रेस को भी उनसे संगठनात्मक अनुशासन सीखना चाहिए। इस बयान के बाद पार्टी के भीतर अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

स्थापना दिवस के कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह की मुलाकात हुई। इसी मुलाकात में राहुल गांधी ने व्यंग्य के अंदाज में दिग्विजय सिंह से कहा कि आपने कल बदतमीजी की। यह टिप्पणी हल्के फुल्के लहजे में कही गई लेकिन इसके राजनीतिक मायने गहरे माने जा रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच इस संवाद को लेकर तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी का यह बयान दरअसल पार्टी लाइन से हटकर दिए गए सार्वजनिक बयानों को लेकर एक संकेत था। कांग्रेस लंबे समय से आरएसएस और भाजपा की विचारधारा का विरोध करती रही है। ऐसे में किसी वरिष्ठ नेता द्वारा उनकी तारीफ करना स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है। राहुल गांधी ने इसे मजाकिया अंदाज में रखते हुए पार्टी की वैचारिक सीमा भी स्पष्ट कर दी।

दिग्विजय सिंह अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। इससे पहले भी उनके कई बयान विवाद का कारण बन चुके हैं। हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि उनका उद्देश्य पार्टी को मजबूत करने के सुझाव देना था न कि विरोधी संगठनों का समर्थन करना। वहीं आलोचकों का मानना है कि ऐसे बयान विपक्ष को अनावश्यक बढ़त देते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह दिखा दिया कि कांग्रेस के भीतर वैचारिक अनुशासन को लेकर नेतृत्व कितना सजग है। राहुल गांधी का यह संदेश साफ था कि पार्टी की विचारधारा सर्वोपरि है और सार्वजनिक मंच पर दिए गए शब्दों का असर दूर तक जाता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस नेता अपने बयानों में कितनी सावधानी बरतते हैं और पार्टी एकजुटता को कैसे मजबूत करती है।

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