नई दिल्ली :- दिल्ली एनसीआर के लोगों को नए साल की शुरुआत में भी न तो प्रदूषण से राहत मिली और न ही कड़ाके की ठंड से। वर्ष के पहले दिन वायु गुणवत्ता सूचकांक बहुत खराब श्रेणी में दर्ज किया गया जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा। औसत AQI 380 के आसपास रहने से सांस संबंधी दिक्कतों में इजाफा देखा गया और सुबह के समय धुंध की मोटी परत छाई रही।
प्रदूषण के कारण सड़कों पर दृश्यता कम हो गई जिससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। खासतौर पर सुबह और देर शाम के समय हालात ज्यादा गंभीर रहे। बच्चों बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को घर के अंदर रहने की सलाह दी गई। अस्पतालों में खांसी सांस फूलने और आंखों में जलन की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है।
ठंड ने भी लोगों की मुश्किलें कम नहीं कीं। तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की गई और ठंडी हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी। कई इलाकों में शीतलहर जैसे हालात बने रहे। खुले में काम करने वाले मजदूर और बेघर लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। रैन बसेरों में लोगों की संख्या बढ़ती नजर आई।
विशेषज्ञों के अनुसार हवा की गति धीमी होने और स्थानीय प्रदूषण स्रोतों के कारण हालात बिगड़े हुए हैं। वाहनों का धुआं निर्माण कार्य और पराली का असर मिलकर प्रदूषण को बढ़ा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में अगर तेज हवाएं नहीं चलीं तो स्थिति में ज्यादा सुधार की उम्मीद कम है।
प्रशासन की ओर से लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। सुबह की सैर और खुले में व्यायाम से बचने को कहा गया है। मास्क के इस्तेमाल और घरों में एयर प्यूरीफायर लगाने की भी अपील की गई है। जब तक मौसम में बदलाव नहीं आता तब तक दिल्ली एनसीआर के लोगों को प्रदूषण और ठंड की इस दोहरी मार का सामना करना पड़ सकता है।