मुंबई (महाराष्ट्र):- हाल के दिनों में रेस्टोरेंट में सर्विस चार्ज को लेकर ग्राहकों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। मुंबई के एक चर्चित मामले के बाद यह विषय एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। कई लोग यह सोचते हैं कि बिल में जोड़ा गया सर्विस चार्ज देना उनकी मजबूरी है लेकिन सरकारी नियम कुछ और ही कहते हैं।
केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाली संस्था सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी ने इस बारे में स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए हैं। इनके अनुसार रेस्टोरेंट में लगाया जाने वाला सर्विस चार्ज पूरी तरह वैकल्पिक है। इसका मतलब यह है कि ग्राहक अपनी इच्छा से ही इसका भुगतान करेगा। कोई भी रेस्टोरेंट मालिक या स्टाफ इसे जबरदस्ती बिल में नहीं जोड़ सकता और न ही ग्राहक पर दबाव बना सकता है।
सरकारी नियमों के मुताबिक रेस्टोरेंट को मेन्यू कार्ड में साफ तौर पर यह जानकारी देनी होगी कि सर्विस चार्ज देना अनिवार्य नहीं है। अगर ग्राहक सेवा से संतुष्ट है तो वह स्वेच्छा से यह राशि दे सकता है। यदि ग्राहक भुगतान से मना करता है तो रेस्टोरेंट उसे सेवा देने से इनकार नहीं कर सकता।
अगर किसी ग्राहक को जबरन सर्विस चार्ज देने के लिए मजबूर किया जाता है तो यह उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसी स्थिति में ग्राहक राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करा सकता है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि सर्विस चार्ज को जीएसटी के साथ जोड़ना गलत है और ऐसा करना नियमों के खिलाफ है।
इस नियम का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों के हितों की रक्षा करना है। कई बार लोग जानकारी के अभाव में अतिरिक्त पैसा चुका देते हैं। अब जरूरी है कि ग्राहक अपने अधिकारों को समझें और जरूरत पड़ने पर आवाज उठाएं। जागरूक ग्राहक ही सही मायनों में मजबूत उपभोक्ता होता है।