नई दिल्ली :- भारत की प्राचीन सभ्यता और सनातन आस्था का सबसे सशक्त प्रतीक सोमनाथ मंदिर एक बार फिर चर्चा में है। ग्यारह जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सोमनाथ मंदिर दौरा प्रस्तावित है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वर्ष दो हजार छब्बीस में सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण को एक हजार वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इतिहास के इतने लंबे कालखंड के बाद भी सोमनाथ मंदिर का अस्तित्व और महत्व आज भी उतना ही जीवंत है।
सोमनाथ मंदिर को भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान प्राप्त है। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि भारतीय आत्मा और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक माना जाता है। वर्ष एक हजार छब्बीस में महमूद गजनवी ने इस मंदिर पर आक्रमण किया था और इसे ध्वस्त कर दिया गया था। इसके बाद भी सोमनाथ की आस्था कभी समाप्त नहीं हुई। हर विनाश के बाद यह मंदिर फिर खड़ा हुआ और भारतीय समाज को यह संदेश देता रहा कि आस्था को नष्ट नहीं किया जा सकता।
इतिहास गवाह है कि सोमनाथ मंदिर को कई बार तोड़ा गया लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ। यह संघर्ष और पुनर्जागरण की कहानी है। आजादी के बाद देश के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसके पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। उनके प्रयासों से सोमनाथ मंदिर फिर से भव्य स्वरूप में स्थापित हुआ और यह स्वतंत्र भारत के आत्मसम्मान का प्रतीक बना।
आज सोमनाथ मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि यह सांस्कृतिक पर्यटन का भी बड़ा केंद्र बन चुका है। देश और दुनिया से लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। प्रधानमंत्री का प्रस्तावित दौरा इस ऐतिहासिक विरासत के महत्व को और रेखांकित करता है।
हजार वर्षों के आक्रमण और संघर्ष के बावजूद सोमनाथ मंदिर आज भी अडिग खड़ा है। यह मंदिर भारतीय सभ्यता की उस शक्ति का प्रतीक है जो हर चुनौती के बाद और अधिक मजबूत होकर सामने आती है। सोमनाथ केवल पत्थरों का ढांचा नहीं बल्कि भारत की अमर चेतना है।