प्रयागराज (उत्तर प्रदेश):- माघ मेला 2026 के अवसर पर प्रयागराज एक बार फिर श्रद्धा और साधना का केंद्र बन गया है। संगम की पावन धरती पर स्नान करने के लिए देश भर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर डुबकी लगाना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं बल्कि आत्मिक शांति की अनुभूति है। इस पावन अवसर पर यदि आप प्रयागराज आ रहे हैं तो यहां की कुछ खास जगहों को देखने से आपकी यात्रा और भी सार्थक हो सकती है।
संगम क्षेत्र माघ मेले का मुख्य आकर्षण है। यहां सूर्योदय के समय स्नान करने का अनुभव अद्भुत होता है। साधु संतों की साधना और मंत्रोच्चार वातावरण को दिव्य बना देता है। संगम से कुछ दूरी पर स्थित अक्षयवट को सनातन परंपरा में अमर वृक्ष माना गया है। यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है।
हनुमान मंदिर प्रयागराज की पहचान माना जाता है। लेटे हुए हनुमान जी की यह प्रतिमा अनोखी है और मान्यता है कि यहां दर्शन से सभी कष्ट दूर होते हैं। इसके बाद आनंद भवन का भ्रमण किया जा सकता है। यह स्थान स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है और नई पीढ़ी को प्रेरणा देता है।
इलाहाबाद किला भी प्रयागराज की ऐतिहासिक धरोहर है। यमुना तट पर स्थित यह किला मुगल काल की स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। यहां से नदी का दृश्य मन को शांति प्रदान करता है। शाम के समय अरैल घाट पर गंगा आरती देखना एक अविस्मरणीय अनुभव बन जाता है।
माघ मेला केवल स्नान तक सीमित नहीं है। यह संस्कृति परंपरा और आत्मिक जागरण का संगम है। कल्पवासियों का अनुशासित जीवन भजन कीर्तन और सत्संग हर आगंतुक को भीतर तक छू जाता है। प्रयागराज की यह यात्रा आस्था इतिहास और आत्मशांति का सुंदर मेल है जो जीवन भर स्मृति में बना रहता है।