नई दिल्ली :- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उस समय जबरदस्त तनाव देखने को मिला जब वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के कथित किडनैप मामले पर रूस और चीन ने कड़ा रुख अपनाया। दोनों देशों ने इस घटना को सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय अपराध करार दिया और इसे किसी संप्रभु देश के आंतरिक मामलों में गंभीर हस्तक्षेप बताया। यूएनएससी की बैठक में यह मुद्दा उठते ही अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर सवालों की बौछार शुरू हो गई।
रूस के प्रतिनिधि ने कहा कि किसी देश के निर्वाचित राष्ट्रपति को जबरन हटाने या किडनैप करने की साजिश अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाएं वैश्विक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा हैं और अगर इन्हें रोका नहीं गया तो दुनिया अराजकता की ओर बढ़ सकती है। चीन ने भी रूस के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि किसी भी देश की संप्रभुता और राजनीतिक व्यवस्था का सम्मान किया जाना चाहिए।
बैठक के दौरान माहौल उस समय और गरमा गया जब अमेरिका की ओर से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत ने इन आरोपों का बेबाक जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका किसी भी अंतरराष्ट्रीय अपराध का समर्थन नहीं करता और लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। ट्रंप के दूत ने यह भी कहा कि वेनेजुएला में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर ध्यान देना चाहिए।
हालांकि उनके इस बयान के बाद रूस और चीन और ज्यादा आक्रामक नजर आए। दोनों देशों ने अमेरिका पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि मानवाधिकारों की आड़ में सत्ता परिवर्तन की कोशिशें स्वीकार नहीं की जा सकतीं। कई अन्य सदस्य देशों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई और निष्पक्ष जांच की मांग की।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यूएनएससी में वैश्विक शक्तियों के बीच गहराते मतभेदों को उजागर कर दिया है। मादुरो के किडनैप का मामला अब सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस पर संयुक्त राष्ट्र क्या ठोस कदम उठाता है और क्या वैश्विक तनाव को कम करने की कोई राह निकल पाती है या नहीं।