क्या है अमेरिकी डीप स्टेट और भारत में क्यों नहीं गली उसकी दाल

वाशिंगटन (अमेरिका):- अमेरिकी डीप स्टेट शब्द अक्सर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और साजिश सिद्धांतों में सुनने को मिलता है। इसका मतलब किसी गुप्त संगठन से नहीं बल्कि अमेरिका के भीतर मौजूद उस स्थायी सत्ता संरचना से है जो सरकार बदलने के बावजूद अपना असर बनाए रखती है। इसमें कुछ नौकरशाह खुफिया एजेंसियां रक्षा उद्योग लॉबी ग्रुप्स और ताकतवर कॉरपोरेट हित शामिल माने जाते हैं। कहा जाता है कि यह तंत्र चुनी हुई सरकारों से अलग रहकर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाता है।

दुनिया के कई देशों में अमेरिकी डीप स्टेट पर सत्ता परिवर्तन करवाने का आरोप लगता रहा है। लैटिन अमेरिका मध्य पूर्व और अफ्रीका के कई देशों में तख्तापलट गृहयुद्ध और राजनीतिक अस्थिरता के पीछे अमेरिका समर्थित ताकतों की भूमिका की चर्चा होती रही है। इराक लीबिया सीरिया और अफगानिस्तान जैसे देशों में दखल देकर शासन व्यवस्था बदलने के उदाहरण अक्सर दिए जाते हैं। इन देशों में कमजोर संस्थाएं आंतरिक विभाजन और आर्थिक निर्भरता के कारण बाहरी हस्तक्षेप आसान हो गया।

लेकिन सवाल उठता है कि भारत में अमेरिकी डीप स्टेट की दाल क्यों नहीं गल पाती। इसका सबसे बड़ा कारण भारत की मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं मानी जाती हैं। भारत में चुनाव आयोग न्यायपालिका मीडिया और सेना जैसी संस्थाएं अपेक्षाकृत स्वतंत्र हैं। सत्ता परिवर्तन केवल चुनाव के जरिए होता है जिससे किसी बाहरी ताकत के लिए सीधे हस्तक्षेप की गुंजाइश कम हो जाती है।

दूसरा अहम कारण भारत की ऐतिहासिक गैर पंक्तिबद्ध नीति रही है। भारत ने कभी भी खुद को पूरी तरह किसी एक महाशक्ति के खेमे में नहीं बांधा। रूस अमेरिका यूरोप और एशिया सभी के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखे। इस संतुलन ने भारत को रणनीतिक रूप से आत्मनिर्भर बनाए रखा।

इसके अलावा भारत का विशाल आकार मजबूत अर्थव्यवस्था और सामाजिक विविधता भी एक कारण है। यहां किसी एक एजेंडे को थोपना आसान नहीं है। जनता राजनीतिक रूप से जागरूक है और राष्ट्रवाद की भावना भी मजबूत है।

कुल मिलाकर अमेरिकी डीप स्टेट की अवधारणा भले ही कई देशों में असरदार मानी जाती हो लेकिन भारत में मजबूत लोकतंत्र राष्ट्रीय हितों पर आधारित विदेश नीति और संस्थागत ताकत के कारण उसकी दाल पूरी तरह नहीं गल पाई है।

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