नई दिल्ली :- अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में भारत की बढ़ती मौजूदगी अब रणनीतिक हलकों में नई हलचल पैदा कर रही है। हाल ही में भारतीय निर्मित हथियारबंद वाहन को लेकर ग्रीस की दिलचस्पी सामने आने के बाद भूमध्यसागरीय क्षेत्र की राजनीति में तनाव की चर्चा तेज हो गई है। ग्रीस की इस पहल को तुर्की के लिए एक रणनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है और इसी कारण तुर्की मीडिया में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
भारतीय रक्षा उद्योग पिछले कुछ वर्षों में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा है। स्वदेशी तकनीक से तैयार हथियारबंद वाहन न केवल भारतीय सेना की जरूरतें पूरी कर रहे हैं बल्कि अब विदेशी देशों का भी ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। ग्रीस जैसे यूरोपीय देश की रुचि यह दर्शाती है कि भारतीय रक्षा उत्पाद वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद माने जाने लगे हैं।
ग्रीस और तुर्की के बीच पहले से ही ऐतिहासिक और सामरिक तनाव रहा है। ऐसे में यदि ग्रीस भारतीय हथियारबंद वाहन को अपने सैन्य बेड़े में शामिल करता है तो क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर इसका असर पड़ सकता है। तुर्की मीडिया ने इस संभावित सौदे को बढ़ा चढ़ाकर पेश करते हुए इसे अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के खिलाफ कदम बताया है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में इसे लगभग युद्ध जैसी स्थिति का संकेत तक कहा जा रहा है।
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रतिक्रिया ज्यादा भावनात्मक और राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है। रक्षा सौदे आमतौर पर लंबी प्रक्रिया से गुजरते हैं और किसी एक सौदे को युद्ध का संकेत कहना अतिशयोक्ति माना जा रहा है। इसके बावजूद यह साफ है कि भारत अब केवल आयातक नहीं बल्कि निर्यातक देश के रूप में उभर रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम से भारत की कूटनीतिक और औद्योगिक ताकत दोनों का प्रदर्शन होता है। ग्रीस की रुचि भारत के लिए नए बाजार खोल सकती है जबकि तुर्की की बेचैनी यह दिखाती है कि वैश्विक रक्षा समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह संभावित सहयोग किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्षेत्रीय राजनीति पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।