ग्रोक एआई से फैल रही आपत्तिजनक सामग्री पर केंद्र सरकार की सख्ती

नई दिल्ली :- भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उपलब्ध ग्रोक एआई को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सरकार का कहना है कि ग्रोक एआई के जरिए कुछ उपयोगकर्ता अश्लील भ्रामक और यौन शोषण से जुड़ी सामग्री तैयार कर रहे हैं जो समाज और कानून दोनों के लिए गंभीर चुनौती है। इसी कारण केंद्र सरकार ने एक्स से जवाब मांगा है कि अब तक ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई की गई है और आगे किस तरह के कदम उठाए जाएंगे।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है कि वे अपने एआई टूल्स का दुरुपयोग रोकें। यदि किसी तकनीक के कारण फर्जी खबरें या आपत्तिजनक सामग्री फैलती है तो उसके लिए केवल उपयोगकर्ता ही नहीं बल्कि प्लेटफॉर्म भी जवाबदेह होगा। सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि आईटी कानून के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

ग्रोक एआई को एक उन्नत चैटबॉट के रूप में पेश किया गया था जो सवालों के जवाब देने में सक्षम है। लेकिन हाल के दिनों में इसके जरिए बनाई गई कुछ पोस्ट ने विवाद खड़ा कर दिया है। इन पोस्ट में न केवल गलत जानकारी फैलाई गई बल्कि नैतिक सीमाओं का भी उल्लंघन हुआ। सरकार का मानना है कि ऐसी सामग्री से युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंच सकता है।

सरकार ने यह भी कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि कोई भी तकनीक कानून से ऊपर हो जाए। एआई का उपयोग जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। यदि जरूरत पड़ी तो सरकार नए दिशा निर्देश भी जारी कर सकती है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

डिजिटल युग में एआई एक शक्तिशाली साधन है लेकिन उसका सही उपयोग ही समाज के हित में है। सरकार की यह पहल स्पष्ट संदेश देती है कि फेक कंटेंट और यौन शोषण से जुड़ी किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

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