नई दिल्ली :- दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में जमीन के बदले नौकरी मामले की सुनवाई के दौरान राजनीति से ज्यादा चर्चा लालू परिवार की अंदरूनी खींचतान की रही। कोर्ट परिसर में जब तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव आमने सामने आए तो माहौल अचानक असहज हो गया। यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं थी बल्कि इसमें वर्षों से दबे भाव और मतभेद साफ झलकते नजर आए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेजस्वी यादव ने इशारों में बातचीत की कोशिश की लेकिन तेज प्रताप यादव का रवैया आक्रामक और नाराजगी भरा रहा। चेहरे के हाव भाव और बॉडी लैंग्वेज से यह स्पष्ट था कि दोनों भाइयों के बीच सब कुछ सामान्य नहीं है। राजनीति के मंच पर भले ही एकता की बात होती रही हो लेकिन कोर्ट कॉरिडोर में सच्चाई कुछ और ही कहानी बयान कर रही थी।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात लालू परिवार की चुप्पी रही। न लालू प्रसाद यादव की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई और न ही परिवार के अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। यह खामोशी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या परिवार अंदरूनी मतभेदों को सार्वजनिक होने देना चाहता है या फिर यह रणनीतिक चुप्पी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं पार्टी की छवि पर असर डाल सकती हैं। खासकर तब जब मामला कानूनी जांच से जुड़ा हो और विपक्ष पहले से ही हमलावर मुद्रा में हो। कोर्ट परिसर में हुई यह छोटी सी झड़प आने वाले समय में बड़े राजनीतिक संकेत दे सकती है।
लालू परिवार हमेशा अपनी एकजुटता के लिए जाना जाता रहा है लेकिन इस घटना ने उस छवि को झटका दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह तनाव यहीं थम जाता है या फिर राजनीति के मैदान में भी इसकी गूंज सुनाई देती है।