Feedback नई दिल्ली:- सरकार ने कीटनाशकों के नियमन और उनके सुरक्षित और प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के लिए मसौदा कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया मांगी है। यह विधेयक 1968 के कीटनाशक अधिनियम को बदलने के लिए लाया जा रहा है। इस विधेयक का उद्देश्य कीटनाशकों के निर्माण, आयात, पैकेजिंग, लेबलिंग, भंडारण, विज्ञापन, बिक्री, परिवहन, वितरण, उपयोग और निपटान को विनियमित करना है, ताकि सुरक्षित और प्रभावी कीटनाशक उपलब्ध हों। विधेयक में मानव स्वास्थ्य, जानवरों, लाभकारी जीवों और पर्यावरण के लिए जोखिम को कम करने पर जोर दिया गया है ।
विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं:
– कीटनाशक पंजीकरण: कीटनाशकों के आयात या निर्माण के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा।
– केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड: एक केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड का गठन किया जाएगा, जो कीटनाशकों के संबंध में वैज्ञानिक और तकनीकी मामलों पर सलाह देगा।
– पंजीकरण समिति: एक पंजीकरण समिति का गठन किया जाएगा, जो कीटनाशकों के पंजीकरण के लिए जिम्मेदार होगी।
– दंड और जुर्माना: कीटनाशक अधिनियम के उल्लंघन के लिए दंड और जुर्माना लगाया जाएगा।
– सुरक्षा और पर्यावरण: कीटनाशकों के उपयोग से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए उपाय किए जाएंगे।
-जैविक कीटनाशक: जैविक कीटनाशकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
– डिजिटल प्रक्रियाएं: कीटनाशकों के पंजीकरण और लिकेंसिंग के लिए डिजिटल प्रक्रियाएं अपनाई जाएंगी।
– परीक्षण प्रयोगशालाएं: कीटनाशक परीक्षण प्रयोगशालाओं का मान्यता अनिवार्य होगा।
– राज्य सरकारों की भूमिका: राज्य सरकारें कीटनाशकों के नियमन और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होंगी।
– जागरूकता और प्रशिक्षण: किसानों और अन्य हितधारकों को कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग के बारे में जागरूक किया जाएगा।
– प्रतिक्रिया: सरकार ने इस मसौदा विधेयक पर 4 फरवरी, 2026 तक प्रतिक्रिया मांगी है।
– लोकसभा में प्रस्तुति: प्रतिक्रिया प्राप्त होने के बाद, विधेयक को लोकसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।
– संसदीय समिति: विधेयक को संसदीय समिति के पास भेजा जा सकता है।
– राज्यसभा में प्रस्तुति: संसदीय समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद, विधेयक को राज्यसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।
– राष्ट्रपति की मंजूरी: दोनों सदनों से पारित होने के बाद, विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
– अधिनियम बनना: राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद, विधेयक अधिनियम बन जाएगा।
– नियम और विनियम: अधिनियम के तहत नियम और विनियम बनाए जाएंगे।
– अमल में लाना: अधिनियम को अमल में लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
– प्रभाव: अधिनियम का प्रभाव किसानों, कीटनाशक निर्माताओं और पर्यावरण पर पड़ेगा।
– चुनौतियां: अधिनियम को लागू करने में कई चुनौतियां हो सकती हैं।
– सफलता: अधिनियम की सफलता इसके प्रभावी कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी।