नई दिल्ली :- दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर वर्ष 2025 के दौरान यात्री यातायात में उम्मीद के विपरीत बढ़ोतरी नहीं हो सकी। हैरानी की बात यह है कि यात्रियों की संख्या 2024 के स्तर पर ही स्थिर बनी रही। यह स्थिति कोविड महामारी और 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद तीसरी बार सामने आई है जब देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे पर ग्रोथ रुक गई हो।
विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण एयरपोर्ट का मुख्य रनवे लंबे समय तक बंद रहना बताया जा रहा है। रनवे बंद होने से उड़ानों की संख्या सीमित हो गई और कई फ्लाइट्स को या तो रद्द करना पड़ा या दूसरे एयरपोर्ट पर शिफ्ट करना पड़ा। इसका सीधा असर यात्रियों की आवाजाही पर पड़ा।
इसके अलावा पाकिस्तानी एयरस्पेस पर लगे प्रतिबंधों ने भी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को प्रभावित किया। कई फ्लाइट्स को लंबा रास्ता अपनाना पड़ा जिससे समय और लागत दोनों बढ़ गईं। इसका असर यात्रियों की पसंद और ट्रैवल प्लान पर देखने को मिला।
एयर इंडिया से जुड़ी एक बड़ी दुर्घटना के बाद सुरक्षा जांच और संचालन में सख्ती बढ़ाई गई। इससे भी उड़ानों के शेड्यूल पर असर पड़ा। वहीं देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो में शेड्यूल गड़बड़ी की शिकायतें लगातार सामने आईं। फ्लाइट देरी और अचानक रद्द होने की घटनाओं से यात्रियों का भरोसा डगमगाया।
इन सभी कारणों ने मिलकर आईजीआई एयरपोर्ट की क्षमता को प्रभावित किया। हालांकि एयरपोर्ट प्रबंधन का कहना है कि स्थिति अस्थायी है और आने वाले महीनों में सुधार की उम्मीद है। रनवे से जुड़ा काम पूरा होने के बाद उड़ानों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
यात्रा विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर बुनियादी ढांचे और संचालन में संतुलन नहीं बना तो भविष्य में भी यात्रियों की संख्या पर असर पड़ सकता है। फिलहाल आईजीआई एयरपोर्ट एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां स्थिरता तो है लेकिन बढ़त की रफ्तार थमी हुई नजर आ रही है।