लखनऊ (उत्तर प्रदेश):- उत्तर प्रदेश के हजारों शिक्षकों के लिए एक सकारात्मक और राहत भरा संकेत सामने आया है। वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा लागू होगी या नहीं इसे लेकर लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के फैसले के बाद यह मामला और जटिल हो गया था लेकिन अब केंद्र सरकार ने इस दिशा में गंभीर पहल शुरू कर दी है।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह सवाल उठने लगा था कि क्या 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। इस अनिश्चितता के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक मानसिक दबाव में थे। कई शिक्षक संगठनों ने इसे लेकर सरकार से स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करने की मांग की थी। उनका कहना था कि नियुक्ति के समय जो नियम लागू थे उसी के आधार पर उनकी सेवाएं सुरक्षित रहनी चाहिए।
अब केंद्र सरकार के स्तर पर इस मुद्दे पर मंथन शुरू होने से शिक्षकों में उम्मीद जगी है। सूत्रों के अनुसार सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले की व्याख्या और उसके व्यावहारिक प्रभावों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। खास बात यह है कि सरकार यह भी समझ रही है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अचानक नई शर्तें लागू करना व्यावहारिक और न्यायसंगत नहीं होगा।
शिक्षक संगठनों का मानना है कि यदि केंद्र सरकार स्पष्ट गाइडलाइन जारी करती है तो राज्यों को भी निर्णय लेने में आसानी होगी। इससे न सिर्फ शिक्षकों की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता भी बनी रहेगी।
फिलहाल सभी की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी है। यदि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट को लेकर स्पष्ट फैसला आता है तो यह लाखों शिक्षकों के लिए बड़ी राहत साबित होगा और लंबे समय से चला आ रहा विवाद भी खत्म हो सकेगा।