नई दिल्ली :- राजधानी दिल्ली के जिस इलाके में हाल ही में पत्थरबाजी की घटना सामने आई वहां स्थित एक मस्जिद को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जांच के दौरान मस्जिद से जुड़े अहम कागजात नहीं मिलने से प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि मस्जिद के करीब 113 साल पुराने दस्तावेज फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जब इलाके में कानून व्यवस्था से जुड़ी जांच आगे बढ़ी तो मस्जिद के स्वामित्व और रिकॉर्ड से जुड़े कागजात मांगे गए। इस दौरान मस्जिद परिसर में मौजूद फाइलों की जांच की गई लेकिन जरूरी दस्तावेज नहीं मिले। अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड का न होना जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
मस्जिद कमेटी ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि दस्तावेजों के गायब होने को गलत अर्थों में नहीं लिया जाना चाहिए। कमेटी के सदस्यों का कहना है कि मस्जिद से जुड़े पुराने कागजात संभवतः वक्फ बोर्ड के पास सुरक्षित हों। उनका दावा है कि समय के साथ कई रिकॉर्ड संस्थानों के बीच स्थानांतरित होते रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मस्जिद इलाके की पहचान का अहम हिस्सा रही है और दशकों से यहां धार्मिक गतिविधियां शांतिपूर्ण तरीके से चलती रही हैं। उनका मानना है कि पत्थरबाजी की घटना के बाद अचानक दस्तावेजों पर सवाल उठना संदेह पैदा करता है।
वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी धार्मिक स्थल को लेकर पूर्वाग्रह नहीं रखा जा रहा है। जांच केवल तथ्यों के आधार पर की जा रही है। अधिकारियों ने वक्फ बोर्ड से संपर्क कर रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
फिलहाल मामला संवेदनशील बना हुआ है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुराने दस्तावेज कब और कहां से सामने आते हैं। इससे न सिर्फ कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी बल्कि इलाके में फैली आशंकाओं को भी शांत करने में मदद मिलेगी।