महंगे पानी पर भारी पड़ा कानून रेस्टोरेंट को चुकानी पड़ी कीमत

नई दिल्ली :- चंडीगढ़ में एक साधारण सी पानी की बोतल ने उपभोक्ता अधिकारों को लेकर बड़ी मिसाल कायम कर दी है। सेक्टर सत्रह स्थित गजल रेस्टोरेंट द्वारा मिनरल वाटर की बोतल तय मूल्य से कहीं अधिक दाम पर बेचने का मामला राज्य उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया। आयोग ने इसे उपभोक्ता के साथ सीधा अन्याय मानते हुए रेस्टोरेंट को दोषी करार दिया है और मुआवजा देने का आदेश जारी किया है।

मामले के अनुसार एक ग्राहक ने रेस्टोरेंट में भोजन के दौरान बीस रुपये की मिनरल वाटर बोतल खरीदी। बिल देखने पर उसे हैरानी हुई क्योंकि उसी बोतल के लिए उससे पचपन रुपये वसूले गए थे। इतना ही नहीं इस अधिक कीमत पर जीएसटी भी जोड़ दिया गया। ग्राहक ने पहले रेस्टोरेंट प्रबंधन से शिकायत की लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उसने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान आयोग ने साफ कहा कि किसी भी होटल या रेस्टोरेंट को एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने का अधिकार नहीं है। बोतल चाहे एसी हॉल में दी जाए या सामान्य जगह पर नियम सभी के लिए समान हैं। आयोग ने इसे उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन माना और रेस्टोरेंट के तर्कों को खारिज कर दिया।

आयोग ने रेस्टोरेंट को निर्देश दिया कि वह ग्राहक को अतिरिक्त वसूली गई राशि लौटाए और मानसिक प्रताड़ना के लिए तय मुआवजा भी अदा करे। इसके साथ ही कानूनी खर्च भी रेस्टोरेंट को ही वहन करना होगा। यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

इस आदेश के बाद शहर के अन्य रेस्टोरेंट और कैफे भी सतर्क हो गए हैं। उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि यह फैसला उन ग्राहकों के लिए राहत भरा है जो अक्सर होटल और रेस्टोरेंट में अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायत करते हैं लेकिन आवाज नहीं उठा पाते। यह मामला साफ संदेश देता है कि नियमों से ऊपर कोई नहीं है और जागरूक उपभोक्ता अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है।

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